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सूर्यवंशी ने जड़ा सबसे तेज लिस्ट ए अर्धशतक: “Sooryavanshi thumps fastest List A fifty as India A win tri-series” | भारत ए ने जीती ट्राई-सीरीज़

Victor Jain · · 1 min read

वैभव सूर्यवंशी का तूफानी प्रदर्शन: एक रिकॉर्ड-तोड़ पारी

दाम्बुला में हुए ट्राई-सीरीज़ के फ़ाइनल मुकाबले में, भारत ए के युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी ने अपनी बल्लेबाज़ी से क्रिकेट जगत में तहलका मचा दिया। ऐसा लग रहा था कि यह किसी अनकैप्ड खिलाड़ी के रूप में उनकी आखिरी पारी हो सकती है, और उन्होंने इसे यादगार बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। सूर्यवंशी ने मात्र 11 गेंदों में लिस्ट ए क्रिकेट का सबसे तेज़ अर्धशतक जड़कर इतिहास रच दिया। उनकी यह अद्भुत पारी अंततः 29 गेंदों में 94 रनों पर समाप्त हुई, जिसमें उन्होंने श्रीलंकाई गेंदबाज़ों की जमकर धुनाई की। उनकी इस तूफानी बल्लेबाज़ी की बदौलत भारत ए ने श्रीलंका ए को ट्राई-सीरीज़ के फाइनल में 66 रनों से करारी शिकस्त दी।

सूर्यवंशी इस फाइनल में आने से पहले चार पारियों में 117 रन बना चुके थे, लेकिन उनकी इस यात्रा का मुख्य आकर्षण चार दिन पहले हुए एक ग्रुप मैच में श्रीलंका ए के खिलाड़ियों के साथ उनकी तनातनी थी। उस घटना के बाद, जहां उन पर फटकार और जुर्माना लगने की बातें चल रही थीं, सूर्यवंशी ने इस बार अपने बल्ले से जवाब देने का फैसला किया। उन्होंने मैदान पर उतरते ही आक्रामक रुख अपनाया और हर गेंद को बाउंड्री लाइन के पार पहुँचाने का लक्ष्य रखा। उनकी पहली पांच गेंदों में से हर गेंद बाउंड्री तक पहुंची, जो उनकी इरादों को स्पष्ट करती थी और उन्होंने दिखा दिया कि वे सिर्फ बल्ले से जवाब देने आए हैं।

सूर्यवंशी ने जिस गति से रन बनाए, उससे ऐसा लग रहा था कि वह लिस्ट ए क्रिकेट का सबसे तेज़ शतक भी लगा सकते हैं, लेकिन नौवें ओवर में श्रीलंका ए के कप्तान और ऑफस्पिनर सहान अराचिगे ने उन्हें आउट कर दिया। तब तक, भारत ए ने सिर्फ 8.5 ओवर में 132 रन बना लिए थे, जो सूर्यवंशी की आंधी का सीधा परिणाम था। उनकी पारी ने टीम को एक ऐसी शुरुआत दी जिसकी बदौलत वे एक विशाल स्कोर की नींव रख सके, जिसे बाद में बाकी बल्लेबाज़ों ने मजबूत किया।

भारत ए की पारी: 400 के करीब पहुंचने का शानदार प्रयास

सूर्यवंशी की धमाकेदार शुरुआत ने भारत ए की पारी की नींव रखी, जो कई मौकों पर लड़खड़ाती हुई भी दिखी, लेकिन अंततः 9 विकेट पर 377 रन के मजबूत स्कोर तक पहुंच गई। एक समय ऐसा लग रहा था कि भारत ए आसानी से 400 से अधिक रन बना लेगी। सलामी बल्लेबाज़ों ने टीम को तूफानी शुरुआत दी, जिसमें ऋतुराज गायकवाड़ ने 40 रनों का योगदान दिया, जबकि तिलक वर्मा ने 67 रनों की महत्वपूर्ण पारी खेली। इन बल्लेबाज़ों ने सूर्यवंशी द्वारा बनाए गए माहौल का भरपूर फायदा उठाया और स्कोरबोर्ड को तेजी से आगे बढ़ाया, जिससे श्रीलंका ए के गेंदबाज़ों पर लगातार दबाव बना रहा।

हालांकि, मध्यक्रम में कुछ विकेट गिरने से रन गति थोड़ी धीमी हुई और टीम को लगा कि वे 400 का आंकड़ा पार नहीं कर पाएंगे। लेकिन इसी मोड़ पर, समस्तीपुर के ही रहने वाले अनुकूल रॉय ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिन्होंने एक बार फिर अपनी हरफनमौला प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

अनुकूल रॉय का हरफनमौला प्रदर्शन: संकटमोचक की भूमिका

अनुकूल रॉय ने न केवल बल्ले से बल्कि गेंद से भी शानदार प्रदर्शन किया। जब भारत ए 334 रन पर 8 विकेट खोकर मुश्किल में थी और कुछ ओवर शेष रहते ऑल आउट होने का खतरा मंडरा रहा था, तब रॉय ने मोर्चा संभाला। उन्होंने सिर्फ 15 गेंदों में चार छक्कों की मदद से ताबड़तोड़ 39 रन बनाए, जिससे भारत ए की पारी को देर से लिफ्ट मिली और वे 377 के स्कोर तक पहुंच सके। यह पारी ऐसे समय में आई जब टीम को इसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी और इसने विपक्षी टीम के मनोबल को तोड़ने में अहम भूमिका निभाई।

बल्लेबाज़ी के अलावा, रॉय ने अपनी बाएं हाथ की स्पिन गेंदबाज़ी से भी दो महत्वपूर्ण विकेट लिए। उन्होंने श्रीलंका ए की उम्मीदों को जीवित रखने वाली 77 रन की सातवें विकेट की साझेदारी को तोड़ा, जब उन्होंने सेट हो चुके विजयकांत व्यासकांत को आउट किया। यह विकेट श्रीलंका ए के लिए एक बड़ा झटका साबित हुआ और मैच का रुख भारत ए की तरफ मोड़ दिया, क्योंकि इसके बाद श्रीलंका ए की पारी लड़खड़ाने लगी।

श्रीलंका ए का संघर्ष और भारत ए के गेंदबाज़ों का दबदबा

378 रनों के विशाल लक्ष्य का पीछा करते हुए श्रीलंका ए की शुरुआत अच्छी नहीं रही, लेकिन उनके बल्लेबाज़ों ने हार नहीं मानी। वानुजा सहान ने 69 गेंदों में 62 रन बनाकर अपनी टीम के लिए सर्वाधिक योगदान दिया, जबकि सदीरा समरविक्रमा ने भी 52 रनों की जुझारू पारी खेली। इन दोनों बल्लेबाज़ों ने मिलकर अपनी टीम को मैच में बनाए रखने की पूरी कोशिश की और कुछ अच्छी साझेदारियां भी निभाईं, लेकिन भारत ए के गेंदबाज़ों ने लगातार दबाव बनाए रखा और उन्हें रन बनाने के ज़्यादा मौके नहीं दिए।

मैच का निर्णायक क्षण तब आया जब वानुजा सहान का विकेट गिरा, जो श्रीलंकाई पारी की सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोरिंग पारी थी। उनके आउट होते ही श्रीलंका ए की उम्मीदें लगभग खत्म हो गईं, और टीम दबाव में बिखर गई। अंततः, श्रीलंका ए की टीम 48वें ओवर में 311 रन पर ऑल आउट हो गई, और भारत ए ने 66 रनों से शानदार जीत दर्ज कर ट्राई-सीरीज़ का खिताब अपने नाम किया।

गेंदबाज़ों का कमाल और निर्णायक क्षण

अनुकूल रॉय के अलावा, भारत ए के लिए तेज गेंदबाज़ यश ठाकुर और लेग-स्पिनिंग ऑलराउंडर विप्राज निगम ने भी शानदार गेंदबाज़ी की। दोनों ने तीन-तीन विकेट लेकर श्रीलंका ए की बल्लेबाज़ी क्रम को ध्वस्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ठाकुर ने शुरुआती झटके दिए और शीर्ष क्रम को परेशान किया, जबकि निगम ने मध्यक्रम में महत्वपूर्ण विकेट चटकाए, जिससे श्रीलंका ए की कोई भी बड़ी साझेदारी मजबूत नहीं हो सकी। उनकी सटीक और अनुशासित गेंदबाज़ी ने यह सुनिश्चित किया कि श्रीलंका ए कभी भी लक्ष्य के करीब न पहुँच पाए और भारतीय टीम ने अपनी जीत सुनिश्चित की।

इस पूरे मैच में, सूर्यवंशी का प्रदर्शन सबसे यादगार रहा, जिसने उन्हें एक उभरते हुए सितारे के रूप में स्थापित किया। उनकी रिकॉर्ड-तोड़ पारी ने न केवल दर्शकों का मनोरंजन किया बल्कि टीम को एक बड़ी जीत भी दिलाई। यह जीत ट्राई-सीरीज़ में भारत ए के प्रभुत्व को दर्शाती है और भविष्य के लिए कई युवा प्रतिभाओं को सामने लाती है। यह फाइनल भारतीय क्रिकेट के युवा सितारों के लिए एक शानदार मंच साबित हुआ, जहां उन्होंने अपनी क्षमता और दृढ़ संकल्प का प्रदर्शन किया और यह साबित किया कि भारतीय क्रिकेट का भविष्य उज्ज्वल है।

Victor Jain

Victor Jain is one of the most recognisable bilingual voices in Indian cricket, serving as a senior Hindi commentator for JioCinema and a columnist for The Caravan. A history graduate from the University of Delhi, Victor brings an archival depth to his analysis, often unearthing forgotten tales from India’s pre‑IPL cricketing heritage. He splits his time between the commentary box and the editing suite, having produced acclaimed short documentaries on the rise of the Women’s Premier League and the fast‑bowling culture in Delhi's club circuit. His work spans live match calling on billion‑strong digital platforms, long‑form features, and media rights commentary, always delivered with a distinctive blend of old‑school reverence and new‑age candour. Victor often says he learned more about cricket from the radio commentaries of the 1990s than any coaching manual — a philosophy that shapes his immersive, story‑driven style.