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Mo Bobat: RCB ‘walk towards pressure situations rather than away from them’ – आरसीबी की नई पहचान: मो बोबट ने बताया क्यों दबाव से नहीं डरती टीम, रजत पाटीदार की तारीफ

Victor Jain · · 1 min read

आईपीएल 2026: दबाव को ताकत बनाकर फाइनल में पहुंची आरसीबी

आईपीएल 2026 के क्वालीफायर 1 में जब रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) का सामना गुजरात टाइटंस (GT) से हुआ, तो मैदान पर एक ऐसा पल आया जिसने पूरे मैच का रुख बदल दिया। यह पल था रजत पाटीदार की धमाकेदार बल्लेबाजी का। गुजरात के गेंदबाज उनके सामने पूरी तरह बेबस नजर आ रहे थे। पाटीदार की यह पारी केवल चौकों और छक्कों की बरसात नहीं थी, बल्कि परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने की उनकी अद्भुत क्षमता का प्रदर्शन था। एक समय जब जेसन होल्डर के दोहरे झटके के बाद टीम मुश्किल में थी, तब पाटीदार 11 गेंदों पर सिर्फ 16 रन बनाकर खेल रहे थे। लेकिन इसके तुरंत बाद उन्होंने खेल का गियर बदला और गुजरात के विश्वस्तरीय गेंदबाजी आक्रमण की धज्जियां उड़ा दीं।

रजत पाटीदार का शानदार प्रदर्शन और कप्तानी की मांग

इस संकटमोचक पारी के बाद, भारतीय टी20 टीम में उनकी जगह और यहाँ तक कि भविष्य की कप्तानी को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। भारतीय क्रिकेट टीम जब एक नए दो साल के विश्व कप चक्र की शुरुआत कर रही है, ऐसे समय में पाटीदार का यह फॉर्म बेहद महत्वपूर्ण है। आईपीएल 2026 में रजत पाटीदार आरसीबी के लिए दूसरे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज हैं। उन्होंने अब तक 196.76 के बेमिसाल स्ट्राइक रेट के साथ 483 रन बनाए हैं। आरसीबी के डायरेक्टर ऑफ क्रिकेट मो बोबट के लिए पाटीदार की यह पारी उनके करियर के शानदार विकास का एक और प्रमाण है।

बोबट ने आरसीबी के लगातार दूसरे आईपीएल फाइनल में पहुंचने के बाद कहा, ‘वह इस समय वाकई बेहतरीन बल्लेबाजी कर रहे हैं और पूरे टूर्नामेंट में उन्होंने ऐसा ही किया है। आज की उनकी पारी बेहद खास थी और मुझे यकीन है कि क्वालीफायर जैसे बड़े मुकाबले में टीम के लिए खड़े होने पर उन्हें गर्व होगा।’ बोबट ने आगे कहा, ‘जब किसी टीम का कप्तान या प्रमुख बल्लेबाज इस तरह खेलता है, तो पूरी टीम का आत्मविश्वास बढ़ जाता है। हम अब उनसे इस तरह की पारियों के आदी हो चुके हैं। उन्होंने कुछ अद्भुत शॉट खेले, लेकिन उनकी आक्रामक मंशा ने टीम का नेतृत्व करने का बेहतरीन उदाहरण पेश किया।’

‘स्पिन-बेशर’ से ऑलराउंडर बल्लेबाज बनने की कहानी

मो बोबट ने रजत पाटीदार के पिछले दो सत्रों के विकास पर एक दिलचस्प किस्सा साझा किया। उन्होंने हंसते हुए कहा, ‘मुझे याद है कि पिछले सीजन में मैंने उन्हें सिर्फ स्पिन खेलने वाला (spin-basher) कह दिया था, जिससे वे थोड़े नाराज हो गए थे क्योंकि उन्हें लगा कि मैं केवल स्पिन के खिलाफ उनकी ताकत की बात कर रहा हूं। शायद अब वे मुझे गलत साबित करने की कोशिश कर रहे हैं।’

बोबट ने बताया कि पाटीदार ने अपनी बल्लेबाजी पर दिनेश कार्तिक (DK) और मुख्य कोच एंडी फ्लावर के साथ मिलकर कड़ी मेहनत की है। उन्होंने कहा, ‘रजत की सबसे बड़ी खासियत यह है कि गेंद अक्सर उनके बल्ले के बिल्कुल बीच (middle) में लगती है। चाहे तेज गेंदबाजी हो या स्पिन, फ्रंट फुट हो या बैक फुट, गेंद हमेशा उनके बल्ले के बीच से निकलती है। यह एक बेहतरीन बल्लेबाज की निशानी है। उनके बेसिक्स बहुत मजबूत हैं और वे बिना किसी डर के खेलते हैं। पिछले कुछ सालों में हमने इसी बेखौफ अंदाज को अपनी टीम की पहचान बनाने की कोशिश की है।’

दबाव में निखरने वाली आरसीबी की नई पहचान

इस सीजन में पाटीदार ने सबसे बेहतरीन काम यह किया है कि उन्होंने सही समय पर सही फैसले लिए हैं। बोबट ने राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ शुरुआती सीजन के एक मैच का उदाहरण देते हुए कहा कि जब आरसीबी ने जल्दी विकेट खो दिए थे, तब पाटीदार ने शुरुआत में दबाव को झेला और फिर तेजी से रन बनाए। क्वालीफायर 1 में भी उन्होंने यही किया। जब टीम ने शीर्ष क्रम के कुछ विकेट खोए, तो उन्होंने पहले पारी को संभाला और फिर आक्रामक रुख अपनाया।

पाटीदार का यह विकास आरसीबी की अपनी प्रगति को भी दर्शाता है। सालों तक आरसीबी को केवल कुछ बड़े सितारों पर निर्भर रहने वाली टीम माना जाता था, लेकिन अब कहानी बदल चुकी है। बोबट ने कहा, ‘मुझे इस बात की सबसे ज्यादा खुशी है कि हमारी जीत में कई खिलाड़ी योगदान दे रहे हैं। जब लोग ‘कम्पलीट टीम’ (पूर्ण टीम) की बात करते हैं, तो मैं इसी बदलाव का जिक्र करता हूं। हम किसी एक या दो खिलाड़ियों पर निर्भर नहीं हैं। चाहे बल्लेबाजी हो या गेंदबाजी, हर मैच में नए खिलाड़ी जिम्मेदारी उठा रहे हैं।’

दबाव की ओर कदम बढ़ाना: टीम का नया मंत्र

आरसीबी की इस नई पहचान को बनाने में कई अनुभवी खिलाड़ियों की भूमिका रही है। बोबट के अनुसार, दबाव के मैचों में अनुभव बहुत मायने रखता है, लेकिन खिलाड़ियों का व्यक्तित्व भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, ‘हर कोई जानता है कि विराट कोहली टीम में क्या लाते हैं – उनकी ऊर्जा, उनका संघर्ष और उनकी भूख। लेकिन टीम के अन्य खिलाड़ी भी अपने-अपने तरीके से ऐसे ही हैं। क्रुणाल पंड्या एक ऐसे खिलाड़ी हैं जिनमें गजब का जुनून और आक्रामकता है। वे हमेशा मुश्किल परिस्थितियों में जिम्मेदारी लेना चाहते हैं। वहीं भुवनेश्वर कुमार और जोश हेजलवुड शांत स्वभाव के हैं, लेकिन वे भी दबाव के पलों में पीछे नहीं हटते। यदि आप एक ऐसी टीम बनाते हैं जहां खिलाड़ी दबाव से भागने के बजाय उसकी ओर बढ़ते हैं, तो यह टीम को बहुत मजबूत बनाता है।’

वेंकटेश अय्यर: निस्वार्थ भावना और बेजोड़ लचीलापन

आरसीबी की इस सामूहिक मानसिकता का सबसे बड़ा उदाहरण वेंकटेश अय्यर हैं। भारत के लिए खेल चुके और आईपीएल जीत चुके वेंकटेश को इस सीजन की शुरुआत बेंच पर बैठकर करनी पड़ी थी। इसके बावजूद उनका रवैया बेहद सकारात्मक रहा। बोबट ने याद किया कि कैसे सीजन की शुरुआत में जब देवदत्त पडिक्कल को नंबर 3 पर मौका मिला और उन्होंने रन बनाए, तो डगआउट में वेंकटेश सबसे ज्यादा खुश थे और उनके लिए तालियां बजा रहे थे।

जब वेंकटेश को मौका मिला, तो उन्होंने इसे दोनों हाथों से लपका। पंजाब किंग्स के खिलाफ पाटीदार की अनुपस्थिति में नंबर 4 पर खेलते हुए उन्होंने नाबाद 73 रनों की मैच जिताऊ पारी खेली। इसके बाद उन्हें सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ ओपनिंग करने के लिए कहा गया और गुजरात के खिलाफ क्वालीफायर 1 में भी उन्होंने यही भूमिका निभाई। उनकी इस बहुमुखी प्रतिभा के कारण टीम अब फिल साल्ट की उंगली की चोट और उनके फाइनल से बाहर होने की आशंका से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। क्वालीफायर 1 में वेंकटेश और विराट कोहली ने पहली ही गेंद से आक्रामक रुख अपनाकर गुजरात को बैकफुट पर धकेल दिया था।

इतिहास रचने के करीब आरसीबी

आरसीबी के इस सीजन की कहानी यही है – अलग-अलग मैच-विजेता, अलग-अलग व्यक्तित्व, लेकिन सबका एक ही लक्ष्य। अब आरसीबी चेन्नई सुपर किंग्स और मुंबई इंडियंस के बाद लगातार दो बार आईपीएल खिताब जीतने वाली तीसरी टीम बनने से सिर्फ एक कदम दूर है। जैसा कि रजत पाटीदार ने कहा, वे अब वास्तव में ‘अटैकिंग चैंपियंस’ बनने की राह पर हैं।

Victor Jain

Victor Jain is one of the most recognisable bilingual voices in Indian cricket, serving as a senior Hindi commentator for JioCinema and a columnist for The Caravan. A history graduate from the University of Delhi, Victor brings an archival depth to his analysis, often unearthing forgotten tales from India’s pre‑IPL cricketing heritage. He splits his time between the commentary box and the editing suite, having produced acclaimed short documentaries on the rise of the Women’s Premier League and the fast‑bowling culture in Delhi's club circuit. His work spans live match calling on billion‑strong digital platforms, long‑form features, and media rights commentary, always delivered with a distinctive blend of old‑school reverence and new‑age candour. Victor often says he learned more about cricket from the radio commentaries of the 1990s than any coaching manual — a philosophy that shapes his immersive, story‑driven style.