लिट्टन दास ने कहा: ‘अगर मैं मिरपुर में इतना ना खेलता, तो मेरी औसत बेहतर होती’
बांग्लादेश के स्टार विकेटकीपर-बल्लेबाज लिट्टन दास ने एक दिलचस्प बातचीत में कहा है कि अगर उन्होंने मिरपुर के शेर-ए-बांग्ला नेशनल क्रिकेट स्टेडियम में इतने सारे मैच नहीं खेले होते, तो उनकी ODI बल्लेबाजी औसत अबसे काफी बेहतर होती। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब बांग्लादेश की घरेलू पिचों की चर्चा पिछले कुछ वर्षों से बल्लेबाजी के लिहाज से बेहद कठिन होने के कारण लगातार हो रही है।
मिरपुर की पिचों ने बनाया प्रभाव
लिट्टन दास ने स्पष्ट किया कि ODI क्रिकेट में 30 की औसत उनके लिए कोई गर्व की बात नहीं है। हालांकि, उन्होंने इसे बांग्लादेश के संदर्भ में कुछ हद तक स्वीकार्य माना, खासकर उन कठिन परिस्थितियों को देखते हुए जिनमें उन्होंने अपना क्रिकेट खेला है।
उन्होंने BCB के पॉडकास्ट में कहा, “ODI में 30 की औसत पर कोई गर्व नहीं किया जा सकता। बांग्लादेश के लिए शायद यह बहुत खराब नहीं है, लेकिन मैं इसे उत्कृष्ट भी नहीं कहूंगा। हमारे बचपन के वातावरण और खेली गई पिचों को ध्यान में रखते हुए, यह कुछ हद तक स्वीकार्य है। शायद इसे 60-40 कहा जा सकता है। अगर किसी दूसरे देश के लिए यही औसत आती, तो मैं इसे सीधे तौर पर खराब कहता।”
पिचों की अनिश्चितता का असर
लिट्टन ने यह भी नोट किया कि सांख्यिकी कभी यह नहीं दिखाती कि बल्लेबाज को किस तरह की पिचों पर खेलना पड़ा। उन्होंने कहा, “अगर मैं शेर-ए-बांग्ला में इतने मैच नहीं खेलता, तो मेरी औसत और स्ट्राइक रेट अबसे बेहतर होती। वहां गेंदबाजी करना बहुत आसान था, लेकिन बल्लेबाजी करना अत्यंत मुश्किल। कभी-कभी तो खुद गेंदबाज भी नहीं जानते थे कि गेंद क्या करेगी—फिर बल्लेबाज कैसे जाने? कई विश्व स्तरीय बल्लेबाज वहां आए और संघर्ष किए।”
अब पिचों में सुधार
हालांकि, लिट्टन ने यह भी महसूस किया है कि पिछले कुछ समय से पिचों की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। उनका मानना है कि बेहतर पिचें बांग्लादेशी बल्लेबाजों को लंबी अवधि में बेहतर आंकड़े हासिल करने में मदद कर सकती हैं।
उन्होंने कहा, “पिछले कुछ समय से विकेट काफी बेहतर हुए हैं। अगर ऐसी स्थिति अगले पांच या छह साल तक बनी रहती है, तो इससे काफी मदद मिलेगी। पहले की विकेटें बल्लेबाजों के आंकड़ों को नुकसान पहुंचा सकती थीं, लेकिन लोग खुश थे क्योंकि टीम जीत रही थी।”
व्यक्तिगत लक्ष्य और लंबी उम्र की उम्मीद
बांग्लादेश के T20I कप्तान लिट्टन दास ने यह भी कबूल किया कि अपनी बैटिंग औसत में सुधार करना उनके लिए एक बड़ा व्यक्तिगत लक्ष्य है।
उन्होंने कहा, “मेरी औसत अभी भी वहां नहीं है जहां मैं चाहता हूं। विकेटकीपिंग एक बात है, लेकिन मैं खुद को मुख्य रूप से बल्लेबाज मानता हूं। T20 क्रिकेट में अब औसत या स्ट्राइक रेट से ज्यादा महत्वपूर्ण होता है प्रभाव, लेकिन टेस्ट और ODI में मेरे आंकड़ों में सुधार का अभी भी अवसर है, जिससे मैं टीम की मदद कर सकता हूं।”
लिट्टन ने अपने ODI करियर के लिए एक बड़ा लक्ष्य भी साझा किया। उन्होंने कहा, “मैं अपना ODI करियर 40 से 45 के बीच औसत के साथ समाप्त करना चाहता हूं। मुझे नहीं पता कि हमें अच्छी पिचें और कितने समय तक मिलेंगी या मैं कितने समय तक खेलता रहूंगा। मैंने पहले ही 100 मैच पार कर लिए हैं, और उनमें से ज्यादातर मैच ऐसी पिचों पर खेले गए थे जहां 240 या 250 भी एक बड़ा स्कोर लगता था। अब बल्लेबाजों को बेहतर सतह मिल रही है। अगर ऐसी पिचें अगले पांच-छह साल तक मिलती रहीं, तो हमारी औसत और स्ट्राइक रेट निश्चित रूप से बेहतर होगी।”
