When Ajinkya Rahane Accused Credit Stealing After India’s Historic BGT Win
भारतीय क्रिकेट का ऐतिहासिक अध्याय और श्रेय का विवाद
साल 2021 की शुरुआत में भारतीय क्रिकेट टीम ने ऑस्ट्रेलिया में जो उपलब्धि हासिल की, वह खेल के इतिहास में हमेशा सुनहरे अक्षरों में दर्ज रहेगी। विराट कोहली की अनुपस्थिति में अजिंक्य रहाणे के नेतृत्व में टीम इंडिया ने बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी जीतकर पूरी दुनिया को हैरान कर दिया था। हालाँकि, इस गौरवपूर्ण जीत के कुछ समय बाद, When Ajinkya Rahane Accused Credit Stealing After India’s Historic BGT Win का मुद्दा चर्चा का विषय बन गया। यह लेख उस समय की घटनाओं और उस विवाद की गहराई में जाता है जिसने क्रिकेट गलियारों में हलचल मचा दी थी।
अजिंक्य रहाणे का दावा: ‘किसी और ने लिया श्रेय’
जीत के कुछ महीने बाद, अजिंक्य रहाणे ने ‘बैकस्टेज विद बोरिया’ शो के दौरान अपनी चुप्पी तोड़ी। रहाणे ने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्हें उस जीत का वह श्रेय नहीं मिला जिसके वे हकदार थे। उन्होंने कहा, ‘मैं जानता हूं कि मैंने वहां क्या किया है। मुझे किसी को बताने की जरूरत नहीं है। श्रेय लेना मेरी फितरत नहीं है। लेकिन यह सच है कि मैदान पर और ड्रेसिंग रूम में जो फैसले मैंने लिए, उनका श्रेय किसी और ने ले लिया।’
रहाणे ने आगे कहा कि मीडिया में जो बातें कही गईं कि ‘मैंने यह किया’ या ‘यह मेरा फैसला था’, वे उन लोगों के लिए थीं जो खुद को बड़ा दिखाने के लिए श्रेय बटोर रहे थे। यह बयान स्पष्ट रूप से टीम के प्रबंधन और उस समय की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला था।
रविचंद्रन अश्विन का खुलासा और रोहित शर्मा की भूमिका
हाल ही में रहाणे के इन बयानों ने फिर से जोर पकड़ा, जब रविचंद्रन अश्विन ने एक पुरानी घटना का जिक्र किया। ब्रिसबेन में खेले गए निर्णायक गाबा टेस्ट के दौरान, अश्विन ने खुलासा किया कि उस समय हेड कोच रवि शास्त्री मैच को ड्रॉ कराने के पक्ष में थे। हालांकि, रोहित शर्मा चाहते थे कि ऋषभ पंत जीत के लिए आक्रामक खेलें।
अश्विन ने ईएसपीएनक्रिकइंफो अवार्ड्स के दौरान बताया, ‘हम एक तरफ खराब मौसम और दूसरी तरफ रवि भाई के उतार-चढ़ाव भरे फैसलों से जूझ रहे थे। रोहित चाहते थे कि ऋषभ जीत के लिए जाएं। यह टेस्ट क्रिकेट की खूबसूरती है कि कैसे चीजें दो घंटों में बदल गईं।’ यह बयान रहाणे के उस दावे को बल देता है कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में कई लोगों की भागीदारी थी, जिसे अक्सर केवल एक तरफा श्रेय के रूप में पेश किया गया।
ऐतिहासिक जीत का सफर
यह श्रृंखला उस समय और भी कठिन थी जब एडिलेड में भारत केवल 36 रनों पर ढेर हो गया था और विराट कोहली टीम छोड़कर स्वदेश लौट आए थे। वहां से वापसी करना एक असंभव सा सपना लगता था। रहाणे ने कप्तान के रूप में मोर्चा संभाला और मेलबर्न में शानदार जीत दर्ज कर श्रृंखला में बराबरी की। सिडनी टेस्ट में अश्विन और हनुमा विहारी की जुझारू साझेदारी ने सीरीज को जीवंत रखा।
गाबा में 328 रनों का पीछा करना भारतीय क्रिकेट की सबसे बड़ी जीतों में से एक है। शुभमन गिल और ऋषभ पंत की पारियां निर्णायक रहीं, लेकिन रहाणे ने खुद भी अपनी 24 रनों की पारी से टीम में आत्मविश्वास जगाया। यह श्रृंखला केवल खिलाड़ियों के कौशल का प्रदर्शन नहीं थी, बल्कि टीम प्रबंधन और कप्तानी के बीच की बारीकियों को समझने का भी एक उदाहरण बन गई।
निष्कर्ष
अजिंक्य रहाणे का श्रेय को लेकर दिया गया बयान आज भी चर्चा का केंद्र है। खेल में कप्तानी और प्रबंधन की भूमिका पर हमेशा से बहस होती रही है। यह विवाद हमें याद दिलाता है कि एक ऐतिहासिक जीत के पीछे न केवल खिलाड़ियों का पसीना होता है, बल्कि ड्रेसिंग रूम के अंदर कई अनकहे संघर्ष और निर्णय भी होते हैं। श्रेय का मुद्दा चाहे जो भी हो, 2021 की वह जीत हमेशा भारतीय क्रिकेट के लिए एक मील का पत्थर बनी रहेगी।
