Latest Cricket News

सौरव गांगुली का खुलासा: मैच फिक्सिंग विवाद और सचिन-द्रविड़ से पूछे गए वो सवाल

Victor Jain · · 1 min read

भारतीय क्रिकेट का वो काला दौर और सौरव गांगुली की जिम्मेदारी

2000 का दशक भारतीय क्रिकेट के इतिहास में एक ऐसा समय था जिसे कोई भी क्रिकेट प्रेमी याद नहीं करना चाहता। यह वो दौर था जब मैच फिक्सिंग के आरोपों ने भारतीय क्रिकेट की नींव हिला दी थी। मोहम्मद अजहरुद्दीन और अजय जडेजा जैसे बड़े नामों पर फिक्सिंग के आरोप लगे, जिसके बाद अजहरुद्दीन पर आजीवन प्रतिबंध और जडेजा पर पांच साल का प्रतिबंध लगाया गया। इस घटना ने न केवल खेल की गरिमा को ठेस पहुंचाई, बल्कि करोड़ों प्रशंसकों का भरोसा भी तोड़ दिया।

ऐसे कठिन समय में, भारतीय क्रिकेट को एक ऐसे चेहरे की जरूरत थी जिस पर जनता दोबारा विश्वास कर सके। यहीं से शुरू हुआ सौरव गांगुली का युग। गांगुली को टीम की कमान तब सौंपी गई जब ड्रेसिंग रूम का माहौल अनिश्चितता से भरा था और प्रशंसकों के बीच हर हार को फिक्सिंग के शक से देखा जा रहा था।

सचिन और द्रविड़ से गांगुली के वो अनकहे सवाल

हाल ही में एक पॉडकास्ट में सौरव गांगुली ने खुलासा किया कि जब उन्होंने कप्तानी संभाली, तो उन्हें फिक्सिंग के बारे में बहुत कम जानकारी थी। गांगुली ने बताया कि वह इस बात को लेकर उत्सुक थे कि क्या वास्तव में ऐसी चीजें क्रिकेट में होती हैं। उन्होंने इस बारे में टीम के सीनियर खिलाड़ियों, सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ से सीधी बात की थी।

गांगुली ने कहा, “कप्तान बनने से ठीक पहले भारतीय टीम जिन मुद्दों का सामना कर रही थी – सट्टेबाजी, मैच फिक्सिंग – मुझे इन चीजों के बारे में पता भी नहीं था। मैं सचिन और राहुल से पूछता रहता था, ‘क्या वाकई ऐसा होता है?’ क्या किसी ने आपसे संपर्क किया है? क्योंकि मुझसे किसी ने संपर्क नहीं किया था।”

उन्होंने आगे बताया, “मैंने सचिन से पूछा था कि ‘तुझे किसी ने पूछा?’ उन्होंने मना कर दिया। मैंने अनिल कुंबले से भी यही सवाल किया, उन्होंने भी कहा कि उनसे कभी किसी ने ऐसी बात नहीं की। उस समय मेरा पूरा ध्यान केवल कप्तानी और टीम को आगे ले जाने पर था, इसलिए मैंने इन चीजों को अपने दिमाग पर हावी नहीं होने दिया।”

कप्तानी के शुरुआती दिन: सीनियर खिलाड़ियों के साथ तालमेल

जब सौरव गांगुली को कप्तान बनाया गया, तब उनकी उम्र महज 27 साल थी। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि टीम में सचिन तेंदुलकर, अनिल कुंबले और जवागल श्रीनाथ जैसे कई दिग्गज सीनियर खिलाड़ी मौजूद थे, जो पहले गांगुली के कप्तान रह चुके थे। गांगुली ने स्वीकार किया कि वह अपनी पहली टीम मीटिंग को लेकर काफी घबराए हुए थे।

उन्होंने उस समय को याद करते हुए बताया, “मुझे आज भी याद है कि हमारा पहला मैच कोच्चि में था। मैच की पूर्व संध्या पर मुझे टीम मीटिंग को संबोधित करना था। मैंने अपनी पत्नी डोना से कहा था कि सचिन और अजहर जैसे खिलाड़ी मेरे कप्तान रहे हैं, अब मैं उन्हें कैसे बताऊं कि क्या करना है और क्या नहीं?”

गांगुली ने मीटिंग को छोटा रखने का फैसला किया। उन्होंने बताया, “मैंने डोना से कहा कि मैं मीटिंग छोटी रखूंगा क्योंकि जितनी लंबी मीटिंग होगी, मुझे उतना ही ज्यादा बोलना पड़ेगा। हमने लगभग 15 मिनट में सब कुछ खत्म कर दिया। अगले ही दिन हमने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ जीत दर्ज की और उसके बाद जमशेदपुर में हुए अगले मैच में मैंने शतक बनाया। धीरे-धीरे चीजें पटरी पर आने लगीं।”

गांगुली का नेतृत्व और भारतीय क्रिकेट का कायाकल्प

सौरव गांगुली के नेतृत्व में भारतीय क्रिकेट ने एक नई पहचान बनाई। उन्होंने टीम को सिखाया कि विदेशी धरती पर कैसे जीता जाता है। उनके पांच साल के कार्यकाल में टीम इंडिया ने कई ऐतिहासिक सफलताएं हासिल कीं, जो पहले नामुमकिन लगती थीं।

गांगुली युग की प्रमुख उपलब्धियां:

  • विदेशी दौरों पर जीत: गांगुली के नेतृत्व में भारत ने विदेशों में टेस्ट मैच और सीरीज जीतना शुरू किया।
  • नेटवेस्ट ट्रॉफी 2002: लॉर्ड्स के मैदान पर इंग्लैंड के खिलाफ ऐतिहासिक जीत, जिसे आज भी गांगुली के टी-शर्ट उतारकर जश्न मनाने के लिए याद किया जाता है।
  • आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2002: भारत और श्रीलंका को संयुक्त विजेता घोषित किया गया था।
  • 2003 विश्व कप फाइनल: 1983 के बाद पहली बार भारत गांगुली की कप्तानी में विश्व कप के फाइनल तक पहुंचा।
  • पाकिस्तान में ऐतिहासिक जीत: गांगुली के नेतृत्व में ही भारत ने पाकिस्तान में अपनी पहली टेस्ट सीरीज जीती।

भविष्य के सितारों को तराशने का श्रेय

सौरव गांगुली की कप्तानी की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि उन्होंने युवाओं पर भरोसा जताया। उन्होंने भारतीय क्रिकेट को ऐसे खिलाड़ी दिए जिन्होंने आगे चलकर इतिहास रच दिया। युवराज सिंह, महेंद्र सिंह धोनी, वीरेंद्र सहवाग, जहीर खान और हरभजन सिंह जैसे दिग्गज खिलाड़ी गांगुली की ही खोज माने जाते हैं।

गांगुली ने न केवल मैच फिक्सिंग के साये से टीम को बाहर निकाला, बल्कि एक आक्रामक और निडर भारत का निर्माण किया। आज के आधुनिक भारतीय क्रिकेट की सफलता की नींव कहीं न कहीं दादा के उसी दौर में रखी गई थी, जब उन्होंने सचिन और द्रविड़ जैसे साथियों के साथ मिलकर एक नए युग की शुरुआत की थी।

Victor Jain

Victor Jain is one of the most recognisable bilingual voices in Indian cricket, serving as a senior Hindi commentator for JioCinema and a columnist for The Caravan. A history graduate from the University of Delhi, Victor brings an archival depth to his analysis, often unearthing forgotten tales from India’s pre‑IPL cricketing heritage. He splits his time between the commentary box and the editing suite, having produced acclaimed short documentaries on the rise of the Women’s Premier League and the fast‑bowling culture in Delhi's club circuit. His work spans live match calling on billion‑strong digital platforms, long‑form features, and media rights commentary, always delivered with a distinctive blend of old‑school reverence and new‑age candour. Victor often says he learned more about cricket from the radio commentaries of the 1990s than any coaching manual — a philosophy that shapes his immersive, story‑driven style.