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सौरव गांगुली ने कैसे एमएस धोनी के करियर को दी रफ्तार: एक अनकही कहानी

Victor Jain · · 1 min read

सौरव गांगुली और एमएस धोनी: एक ऐतिहासिक तालमेल

भारतीय क्रिकेट के इतिहास में सौरव गांगुली का नाम एक ऐसे कप्तान के रूप में दर्ज है, जिन्होंने न केवल टीम को संवारा, बल्कि भविष्य के कई महान खिलाड़ियों की नींव भी रखी। हाल ही में एक पॉडकास्ट के दौरान, सौरव गांगुली ने एमएस धोनी को भारतीय टीम में शामिल करने और उन्हें तेजी से आगे बढ़ाने के अपने फैसले पर खुलकर बात की।

प्रतिभा को पहचानने की कला

गांगुली ने बताया कि धोनी को भारतीय टीम में शामिल करने की प्रक्रिया में पूर्व चयनकर्ता सबा करीम की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण थी। सबा करीम ने ही सबसे पहले धोनी की आक्रामक बल्लेबाजी और छक्के मारने की क्षमता के बारे में गांगुली को अवगत कराया था। गांगुली ने कहा, ‘सबा करीम ने मुझसे कहा कि वह बहुत छक्के मारता है, जिसके बाद हमने उसे सीधे इंडिया ए के लिए चुना।’

धोनी को ‘फास्ट-ट्रैक’ करने की रणनीति

गांगुली का मानना था कि जो खिलाड़ी प्रतिभाशाली हैं, उन्हें बहुत लंबे समय तक घरेलू क्रिकेट में नहीं रखना चाहिए। उनका तर्क स्पष्ट था: ‘यदि आप किसी खिलाड़ी को बहुत धीमी प्रक्रिया में पकाते रहेंगे, तो उसकी प्रतिभा खत्म हो जाएगी। जो खिलाड़ी अच्छा है, उसे तुरंत आगे बढ़ाना चाहिए।’

गांगुली की क्रिकेटिंग फिलॉसफी यह थी कि अगर आप अपने स्तर से ऊपर के खिलाड़ियों के साथ खेलते हैं, तो आपका खेल अपने आप निखर जाता है। यदि आप अपने से कमजोर खिलाड़ियों के साथ खेलते रहेंगे, तो आपका स्तर गिरने लगेगा। इसी सोच के साथ उन्होंने धोनी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सीधे मौका दिया।

मैदान पर निगरानी और अंतिम निर्णय

दिलचस्प बात यह है कि धोनी को टीम में शामिल करने से पहले गांगुली ने खुद उनकी प्रतिभा को परखने का फैसला किया था। गांगुली ने बताया, ‘मैंने धोनी को फाइनल करने से पहले खुद जाकर देखने का फैसला किया। मैं जमशेदपुर गया था और उन्हें खेलते हुए देखा। धोनी को उस वक्त पता भी नहीं था कि मैं वहां उन्हें देख रहा हूं।’ यह गांगुली की उस नेतृत्व क्षमता को दर्शाता है, जिसने भारतीय क्रिकेट को युवराज सिंह, वीरेंद्र सहवाग, हरभजन सिंह और जहीर खान जैसे दिग्गज दिए।

धोनी का उदय: एक ऐतिहासिक मोड़

जब धोनी को टीम में मौका मिला, तो गांगुली ने उन्हें नंबर 3 पर बल्लेबाजी के लिए प्रमोट किया। धोनी ने इस भरोसे को बखूबी निभाया और 148 रनों की यादगार पारी खेलकर खुद को साबित कर दिया। यह पारी इस बात का प्रमाण थी कि गांगुली का फैसला बिल्कुल सही था। एमएस धोनी बाद में चलकर न केवल भारत के सबसे सफल कप्तानों में से एक बने, बल्कि उन्होंने 15,000 से अधिक अंतरराष्ट्रीय रन और तीन आईसीसी ट्रॉफियां भी जीतीं।

निष्कर्ष

सौरव गांगुली की यह दूरदर्शिता ही थी जिसने धोनी जैसे ‘झारखंड के लड़के’ को विश्व पटल पर एक महान क्रिकेटर के रूप में स्थापित किया। गांगुली ने न केवल धोनी पर दांव लगाया, बल्कि उन्हें उस आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ाया, जिसकी उस समय भारतीय टीम को सख्त जरूरत थी। आज धोनी की सफलता के पीछे गांगुली के उन शुरुआती फैसलों का बड़ा हाथ है, जिन्होंने भारतीय क्रिकेट की दिशा हमेशा के लिए बदल दी।

यह कहानी हमें याद दिलाती है कि एक अच्छा लीडर वही है जो सही समय पर सही खिलाड़ी की क्षमता को पहचानकर उसे निडर होकर आगे बढ़ने का मौका दे। धोनी और गांगुली की यह कहानी हमेशा क्रिकेट प्रेमियों के लिए एक प्रेरणा बनी रहेगी।

Victor Jain

Victor Jain is one of the most recognisable bilingual voices in Indian cricket, serving as a senior Hindi commentator for JioCinema and a columnist for The Caravan. A history graduate from the University of Delhi, Victor brings an archival depth to his analysis, often unearthing forgotten tales from India’s pre‑IPL cricketing heritage. He splits his time between the commentary box and the editing suite, having produced acclaimed short documentaries on the rise of the Women’s Premier League and the fast‑bowling culture in Delhi's club circuit. His work spans live match calling on billion‑strong digital platforms, long‑form features, and media rights commentary, always delivered with a distinctive blend of old‑school reverence and new‑age candour. Victor often says he learned more about cricket from the radio commentaries of the 1990s than any coaching manual — a philosophy that shapes his immersive, story‑driven style.