“Selection should never be about what’s best for Virat, Rohit or Bumrah” – Sanjay Manjrekar Sends Strong Message to BCCI
भारतीय क्रिकेट में चयन पर छिड़ी नई बहस
बीसीसीआई द्वारा आगामी वनडे सीरीज के लिए चुनी गई टीम को लेकर एक बार फिर बहस शुरू हो गई है। हर बार की तरह, यह बहस उसी पुराने सवाल पर केंद्रित है: क्या प्रतिष्ठा हालिया प्रदर्शन से अधिक महत्वपूर्ण होनी चाहिए? पूर्व भारतीय बल्लेबाज संजय मांजरेकर ने इस मुद्दे पर बेहद मुखर होकर अपनी राय रखी है और चयनकर्ताओं के सामने एक गंभीर चुनौती पेश की है।
मांजरेकर के अनुसार, “Selection should never be about what’s best for Virat, Rohit or Bumrah” – Sanjay Manjrekar का मानना है कि चयन प्रक्रिया पूरी तरह से टीम के हित में होनी चाहिए, न कि किसी बड़े नाम को खुश करने के लिए।
यशस्वी जायसवाल की अनदेखी पर सवाल
इस विवाद का एक मुख्य बिंदु युवा बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल का टीम में नियमित न होना है। रोहित शर्मा को टीम में बरकरार रखा गया है, लेकिन इसके बदले में भारत के सबसे होनहार युवा प्रतिभाओं में से एक, यशस्वी जायसवाल को बाहर बैठना पड़ा है। जायसवाल ने जब भी वनडे फॉर्मेट में मौका पाया है, उन्होंने अपनी काबिलियत साबित की है। पिछले तीन वनडे मैचों में दो शतक जड़कर उन्होंने अपना दावा और मजबूत किया है।
संजय मांजरेकर ने इस स्थिति पर दुख व्यक्त करते हुए कहा, “यशस्वी ने अपने पिछले तीन वनडे मैचों में दो शतक लगाए हैं। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 116 रन की नाबाद पारी खेलने के बाद, थोड़ा अंतराल लेकर उन्होंने एक और शतक जड़ा। भारत जैसी मजबूत टीम में जो भी ओपनिंग करेगा, उसे मौके मिलेंगे और यशस्वी ने इन मौकों का भरपूर फायदा उठाया है। इसलिए, यह काफी दुर्भाग्यपूर्ण और कठोर निर्णय है।”
रोहित शर्मा का भविष्य और 2027 विश्व कप
मांजरेकर ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें रोहित शर्मा के चयन से कोई समस्या नहीं है, बशर्ते चयनकर्ता उन्हें 2027 के वनडे विश्व कप की योजनाओं का हिस्सा मानते हों। उन्होंने कहा, “अगर चयनकर्ताओं ने रोहित को चुना है, तो मुझे उम्मीद है कि यह इसलिए है क्योंकि वे उन्हें वास्तव में 2027 विश्व कप की योजनाओं का हिस्सा मानते हैं।”
हालांकि, पूर्व क्रिकेटर ने इस बात पर चिंता जताई कि क्या खिलाड़ी का नाम ही उसके चयन का एकमात्र आधार बन रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि अगर खिलाड़ी को सिर्फ इसलिए चुना जा रहा है क्योंकि चयनकर्ता उसे बाहर करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं, तो यह भारतीय क्रिकेट के लिए एक पुरानी और गंभीर समस्या है।
टीम का हित बनाम व्यक्तिगत कद
मांजरेकर ने भारतीय क्रिकेट की संस्कृति पर कटाक्ष करते हुए कहा, “हम सभी बड़े नामों के इर्द-गिर्द घूमने वाली संस्कृति को जानते हैं। फैसले शायद ही कभी केवल क्रिकेट के गुणों पर आधारित होते हैं। रोहित के मामले में भी ऐसा ही लगता है। यदि चयनकर्ता मानते हैं कि रोहित लंबी अवधि की योजना का हिस्सा हैं, तो उन्हें यह स्पष्ट करना चाहिए। लेकिन अगर उन्हें सिर्फ इसलिए चुना गया है क्योंकि टीम उन्हें बाहर करने के लिए तैयार नहीं है, तो यह वर्षों से चली आ रही एक समस्या को दर्शाता है। चयन कभी भी इस बारे में नहीं होना चाहिए कि विराट, रोहित या बुमराह के लिए सबसे अच्छा क्या है। यह हमेशा इस बारे में होना चाहिए कि भारतीय क्रिकेट के लिए सबसे अच्छा क्या है।”
युवा प्रतिभाओं का भविष्य
इस चर्चा के बीच, मांजरेकर ने 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी का भी जिक्र किया, जो आयरलैंड और इंग्लैंड के दौरे के लिए भारतीय टीम के साथ जा रहे हैं। श्रीलंका में इंडिया ए के दौरे के दौरान एक मैदान पर हुई बहस के बावजूद, मांजरेकर का मानना है कि यह अनुभव उन्हें और अधिक परिपक्व बनाएगा। उन्होंने कहा, “उसने एक सबक सीखा है। वह एक बहुत ही जागरूक और परिपक्व लड़का लगता है और भविष्य में ऐसी स्थितियों को बेहतर तरीके से संभालेगा।”
अंततः, भारतीय क्रिकेट टीम जिस दौर से गुजर रही है, उसमें अनुभवी खिलाड़ियों और उभरती प्रतिभाओं के बीच सही संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती है। यदि टीम को भविष्य के विश्व कप के लिए तैयार होना है, तो अंततः प्रदर्शन को ही चयन का सबसे बड़ा आधार बनाना होगा।
