Root rides again in moment of crisis as England pay the price for optics
इंग्लैंड क्रिकेट में एक अनपेक्षित संकट
पुराने कहावतों में कहा जाता है कि कभी पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए। जो रूट ने कभी ऐसा संकेत नहीं दिया था कि वह अपने 64 टेस्ट मैचों के कप्तानी के दौर की उन परेशानियों को फिर से जीना चाहते हैं। लेकिन घटनाओं के एक चौंकाने वाले मोड़ ने दिखा दिया है कि इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड (ECB) ने स्थिति को कितना पेचीदा बना दिया है। Root rides again in moment of crisis as England pay the price for optics, और यह स्थिति पूरी तरह से प्रबंधन की विफलताओं का परिणाम है।
बेन स्टोक्स का निलंबन और ईसीबी की नीति
मात्र 24 घंटे पहले, क्रिकेट जगत बेन स्टोक्स के टेस्ट संन्यास की खबरों से परेशान था। उनके ‘प्रोटोकॉल उल्लंघन’ यानी देर रात तक बाहर रहने के मामले को टीम की छवि के लिए एक बड़ा खतरा माना गया। हालांकि, इस पूरे विवाद के पीछे की सच्चाई और तथ्यों को नजरअंदाज करना ईसीबी की जल्दबाजी को दर्शाता है। स्टोक्स और उनके साथी गस एटकिंसन पर जो कार्रवाई हुई, वह केवल ‘ऑप्टिक्स’ या दिखावे के लिए की गई सजा का हिस्सा थी।
हैर्री ब्रूक और दोहरा मानदंड
ऐसी अराजक स्थितियों में, हैरी ब्रूक को स्टोक्स की जगह कप्तानी देने का विचार तार्किक नहीं था। हालांकि कुछ लोग तर्क दे सकते हैं कि ब्रूक ने अक्टूबर में वेलिंगटन में एक नाइटक्लब घटना के बाद अपनी सजा भुगत ली थी, लेकिन उन्हें कप्तानी देना पाखंडपूर्ण होता। स्टोक्स, जो खुद इन परिस्थितियों को बेहतर समझते हैं, इस दुविधा को अच्छी तरह जानते थे।
स्टोक्स का अतीत और वर्तमान की हकीकत
करीब एक दशक पहले 2017 में ब्रिस्टल में हुई घटना स्टोक्स के करियर का एक काला अध्याय रही है। आज की स्थिति, जहां स्टोक्स को देर रात बाहर रहने के लिए घेरा जा रहा है, उस घटना से कहीं अलग है। चेलसी के रेक्स रूम्स की तुलना ब्रिस्टल के उस बार से करना बेमानी है। 35 वर्ष की आयु में, एक टेस्ट मैच की जीत के बाद अगर स्टोक्स ने अपने साथियों के साथ समय बिताया, तो यह ईसीबी द्वारा थोपे गए कृत्रिम कर्फ्यू के खिलाफ एक मौन विरोध भी हो सकता है।
जो रूट की वापसी: मजबूरी या जिम्मेदारी?
अब जो रूट पर जिम्मेदारी है कि वे इस स्थिति को संभाले। रूट की नियुक्ति ‘अंतरिम’ है, जो यह स्पष्ट करती है कि यह केवल स्टोक्स को मानसिक शांति और अपने भविष्य पर निर्णय लेने का समय देने के लिए है। रूट का वापस आना माइक एथरटन के 2001 के दौर की याद दिलाता है, जब उन्हें बिना किसी इच्छा के कप्तानी लेनी पड़ी थी।
- रूट का रिकॉर्ड: 2018 में भारत के खिलाफ 4-1 की ऐतिहासिक जीत।
- चुनौतियां: 2021-22 के कोविड-ग्रस्त सत्र में 17 में से केवल 1 जीत।
- नेतृत्व: एक बार फिर सीनियर खिलाड़ी जिम्मेदारी ले रहे हैं जबकि प्रबंधन केवल दिखावे में व्यस्त है।
निष्कर्ष
क्या यह नियुक्ति इंग्लैंड क्रिकेट के लिए एक नया सवेरा लाएगी? यह कहना मुश्किल है। लेकिन वर्तमान में, यह टीम को एक अनावश्यक विघटन से बचाने का एकमात्र तरीका प्रतीत होता है। जो रूट का फिर से कमान संभालना इंग्लैंड के इस महान ऑलराउंडर बेन स्टोक्स को एक असामयिक संन्यास से बचाने की एक आखिरी कोशिश हो सकती है। क्रिकेट प्रशंसकों की नजरें अब इस पर टिकी हैं कि क्या रूट इस संकट से टीम को बाहर निकाल पाएंगे।
