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राजस्थान रॉयल्स की बिक्री पर विवाद: कल सोमानी समूह ने लगाया ‘जबरन बाहर’ करने का आरोप

Victor Jain · · 1 min read

राजस्थान रॉयल्स की बिक्री पर मचा बवाल: कल सोमानी बनाम मित्तल समूह

इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) की सबसे चर्चित टीमों में से एक, राजस्थान रॉयल्स (RR), इस समय मैदान के बाहर एक बड़े कानूनी और कॉर्पोरेट विवाद के केंद्र में है। राजस्थान रॉयल्स के मालिकाना हक को लेकर चल रही खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है। उद्यमी कल सोमानी के नेतृत्व वाले एक प्रभावशाली कंसोर्टियम ने दावा किया है कि उन्हें इस मेगा डील से ‘जबरन बाहर’ किया गया है, जबकि वे छह महीने से इस प्रक्रिया में सबसे आगे थे।

अंततः, राजस्थान रॉयल्स ने लक्ष्मी एन. मित्तल और उनके बेटे आदित्य मित्तल की अगुवाई वाले समूह को चुना। इस फैसले ने खेल जगत और कॉर्पोरेट गलियारों में हलचल मचा दी है, क्योंकि सोमानी समूह ने अब इस पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।

क्या था सोमानी-मित्तल विवाद का पूरा घटनाक्रम?

इस विवाद की जड़ें मार्च 2024 में हुए घटनाक्रमों में छिपी हैं। 24 मार्च को यह खबर सामने आई थी कि कल सोमानी के नेतृत्व वाले समूह ने राजस्थान रॉयल्स में बहुमत हिस्सेदारी खरीदने के लिए 1.63 बिलियन डॉलर (लगभग 15,000 करोड़ रुपये) का सौदा पक्का कर लिया है।

सोमानी के इस कंसोर्टियम में वैश्विक व्यापार और खेल जगत के कुछ सबसे बड़े नाम शामिल थे। इसमें वॉलमार्ट परिवार के रॉब वाल्टन और एनएफएल टीम डेट्रायट लायंस के मालिक हैम्प परिवार जैसे दिग्गज निवेशक शामिल थे। उस समय ऐसा लग रहा था कि यह समूह राजस्थान रॉयल्स की कमान संभालने के लिए पूरी तरह तैयार है।

हालांकि, 3 मई को स्थिति पूरी तरह बदल गई। आधिकारिक तौर पर घोषणा की गई कि लक्ष्मी एन. मित्तल और आदित्य मित्तल के समूह ने फ्रेंचाइजी के अधिग्रहण के लिए एक निश्चित समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। मित्तल समूह की बोली का मूल्य लगभग 1.65 बिलियन डॉलर (करीब 15,660 करोड़ रुपये) था।

सोमानी समूह का पलटवार: ‘हमें मजबूर किया गया’

डील हाथ से निकलने के बाद, सोमानी समूह ने एक विस्तृत बयान जारी कर उन मीडिया रिपोर्टों का खंडन किया है जिनमें कहा गया था कि उन्होंने खुद को रेस से बाहर कर लिया था। समूह ने स्पष्ट किया कि उन्हें जानबूझकर किनारे लगाया गया।

अपने बयान में उन्होंने कहा, “हम राजस्थान रॉयल्स के स्वामित्व समूह का हिस्सा न बन पाने से बेहद निराश हैं। हम छह महीने की लंबी प्रक्रिया के दौरान शुरू से अंत तक सबसे मजबूत बोली लगाने वाले समूह थे। प्रेस में फैलाई गई खबरें कि हमने अपनी बोली वापस ले ली थी, पूरी तरह से गलत और निराधार हैं।”

समूह ने आगे विस्तार से बताया कि उन्होंने आईपीएल को अंतरराष्ट्रीय ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए एनएफएल, एमएलबी, ईपीएल और ला लीगा जैसे वैश्विक खेलों का अनुभव रखने वाले दिग्गजों को एक साथ लाया था।

पारदर्शिता और ईमानदारी पर सवाल

सोमानी कंसोर्टियम का दावा है कि वे हर स्तर पर तैयार थे और उनके पास दस्तावेजी प्रमाण भी थे। बयान के अनुसार, उन्हें सूचित किया गया था कि शनिवार को होने वाली बोर्ड बैठक उनके कंसोर्टियम को मंजूरी देने के लिए बुलाई गई थी, लेकिन अंत में ऐसा नहीं हुआ।

उन्होंने प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा: “हमारा मानना ​​है कि यह परिणाम एक समान अवसर (Level Playing Field) को नहीं दर्शाता है। इतनी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को पारदर्शिता, निरंतरता और ईमानदारी के साथ संचालित किया जाना चाहिए, जो यहाँ नहीं दिखी।”

मित्तल-पूनवाला डील का भविष्य और संरचना

एक तरफ जहां सोमानी समूह अपनी नाराजगी जाहिर कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ मित्तल परिवार के साथ राजस्थान रॉयल्स का सौदा आगे बढ़ चुका है। इस नए मालिकाना हक के ढांचे में कई बड़े नाम शामिल हैं:

  • प्रमुख हिस्सेदारी: मित्तल परिवार के पास अब फ्रेंचाइजी की 75 प्रतिशत कमान होगी।
  • साझेदार: सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ अदार पूनवाला इस सौदे में मित्तल के साथ हैं, जिनकी हिस्सेदारी लगभग 18 प्रतिशत होगी।
  • शेष हिस्सेदारी: मनोज बदाले और अन्य मौजूदा शेयरधारकों के पास लगभग 7 प्रतिशत हिस्सेदारी बनी रहेगी।

यह सौदा केवल आईपीएल टीम तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें राजस्थान रॉयल्स का पूरा वैश्विक पोर्टफोलियो शामिल है, जिसमें दक्षिण अफ्रीका की पार्ल रॉयल्स (SA20) और कैरेबियन प्रीमियर लीग की बारबाडोस रॉयल्स भी शामिल हैं। यह अधिग्रहण 2026 की तीसरी तिमाही तक पूरी तरह संपन्न होने की उम्मीद है।

निष्कर्ष

राजस्थान रॉयल्स का यह मालिकाना विवाद यह दर्शाता है कि आईपीएल अब केवल एक खेल नहीं, बल्कि अरबों डॉलर का एक जटिल वैश्विक व्यापार बन चुका है। जहां मित्तल समूह अपनी नई पारी की तैयारी कर रहा है, वहीं सोमानी समूह ने संकेत दिया है कि वे भविष्य में अन्य वैश्विक खेल अवसरों में अपनी पूंजी और विशेषज्ञता का निवेश करेंगे। देखना यह होगा कि क्या यह विवाद कानूनी मोड़ लेता है या खेल की भावना के साथ शांत हो जाता है।

Victor Jain

Victor Jain is one of the most recognisable bilingual voices in Indian cricket, serving as a senior Hindi commentator for JioCinema and a columnist for The Caravan. A history graduate from the University of Delhi, Victor brings an archival depth to his analysis, often unearthing forgotten tales from India’s pre‑IPL cricketing heritage. He splits his time between the commentary box and the editing suite, having produced acclaimed short documentaries on the rise of the Women’s Premier League and the fast‑bowling culture in Delhi's club circuit. His work spans live match calling on billion‑strong digital platforms, long‑form features, and media rights commentary, always delivered with a distinctive blend of old‑school reverence and new‑age candour. Victor often says he learned more about cricket from the radio commentaries of the 1990s than any coaching manual — a philosophy that shapes his immersive, story‑driven style.