राजस्थान रॉयल्स की डील पर अमेरिका के कंसोर्टियम ने उठाए सवाल: जानें क्या है पूरा विवाद
राजस्थान रॉयल्स की मालिकाना हक में आया नया विवाद
इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) की पूर्व चैंपियन टीम राजस्थान रॉयल्स (RR) हाल ही में एक बड़ी डील के कारण चर्चा में है। मित्तल परिवार और अदार पूनावाला ने इस फ्रेंचाइजी को 15,660 करोड़ रुपये के भारी-भरकम सौदे में खरीदने का फैसला किया है। हालांकि, इस डील के अंतिम रूप लेने से पहले ही एक विवाद ने तूल पकड़ लिया है।
अमेरिकी कंसोर्टियम का चौंकाने वाला दावा
इस अधिग्रहण की प्रक्रिया में केवल मित्तल और पूनावाला ही नहीं, बल्कि अमेरिका के कल सोमानी के नेतृत्व में एक कंसोर्टियम भी शामिल था। इस समूह में वॉलमार्ट के रॉब वॉल्टन और शीला फोर्ड हैंप ग्रुप के माइकल हैंप भी शामिल थे। नीलामी प्रक्रिया पूरी होने के बाद, इस अमेरिकी कंसोर्टियम ने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की है।
उनका दावा है कि वे छह महीने लंबी चली इस पूरी प्रक्रिया में शुरुआत से ही ‘लीड बिडर’ बने हुए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें समान अवसर नहीं दिए गए और डील के दौरान पारदर्शिता का अभाव था।
क्या थी सोमानी समूह की योजना?
अपने आधिकारिक बयान में अमेरिकी कंसोर्टियम ने कहा, “हम राजस्थान रॉयल्स के स्वामित्व समूह का हिस्सा न बन पाने से बेहद निराश हैं। हमने खेल की दुनिया में एनएफएल (NFL), एमएलबी (MLB), ईपीएल (EPL) और ला लीगा जैसे बड़े मंचों पर काम करने वाले निवेशकों को एकजुट किया था। हमारा लक्ष्य IPL को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाइयों पर ले जाना था।”
फंडिंग पर लगाए गए आरोपों का खंडन
डील के विफल होने के बाद मीडिया में ऐसी खबरें आईं कि अमेरिकी समूह के पास धन की कमी थी, जिसके कारण उनका सौदा रद्द हो गया। कल सोमानी ने इन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया: “मीडिया में फैलाई गई ऐसी खबरें पूरी तरह से गलत हैं। हमारा समूह पूरी तरह से फंडेड था और हमने कभी भी अपनी बोली वापस नहीं ली थी। हमारे पास सभी आवश्यक दस्तावेज मौजूद थे और हमें बताया गया था कि शनिवार की बोर्ड बैठक में हमारे कंसोर्टियम को मंजूरी मिल जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।”
खेल जगत में निवेश का बदलता स्वरूप
राजस्थान रॉयल्स के इस अधिग्रहण के साथ ही मित्तल और पूनावाला को टीम के अन्य अंतरराष्ट्रीय वेंचर्स, जैसे पारल रॉयल्स (SA20) और बारबाडोस रॉयल्स (कैरेबियन प्रीमियर लीग) का भी नियंत्रण मिल गया है। उल्लेखनीय है कि इसी तरह से आईपीएल 2026 सीजन से ठीक पहले रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) का स्वामित्व भी बिरला समूह के नेतृत्व वाले एक ग्रुप ने हासिल किया था।
निष्कर्ष
खेल और व्यापार के इस संगम में राजस्थान रॉयल्स का यह मामला भविष्य में कई सवालों को जन्म दे सकता है। अमेरिकी कंसोर्टियम का यह कड़ा बयान यह दर्शाता है कि IPL अब केवल एक क्रिकेट लीग नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे बड़े कॉर्पोरेट युद्धों का अखाड़ा बन चुका है। हालांकि, मित्तल और पूनावाला की एंट्री के साथ राजस्थान रॉयल्स के प्रशंसक अब आगामी सीजन्स में टीम के प्रदर्शन पर अपनी नजरें टिकाए हुए हैं।
इमानदारी, अखंडता और पेशेवर रवैये की दुहाई देने वाले इस कंसोर्टियम का दावा है कि उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया में पूरी निष्ठा के साथ भाग लिया था। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या बीसीसीआई (BCCI) या फ्रेंचाइजी प्रबंधन इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया देता है या नहीं।
