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मनोज तिवारी का बड़ा खुलासा: टीएमसी छोड़ने के बाद लगाए 5 करोड़ की रिश्वतखोरी के आरोप

Milo Singh · · 1 min read

मनोज तिवारी का राजनीति से मोहभंग: टीएमसी पर लगाए गंभीर आरोप

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व खिलाड़ी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विधायक मनोज तिवारी ने राजनीति के गलियारों में एक बड़ा धमाका किया है। उन्होंने अपनी ही पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। तिवारी ने न केवल टीएमसी से अपना नाता तोड़ लिया है, बल्कि पार्टी के भीतर चल रही टिकटों की खरीद-फरोख्त पर भी बड़े सवाल उठाए हैं।

पांच करोड़ की रिश्वत और टिकट की राजनीति

मनोज तिवारी ने खुलासा किया कि उन्हें हाउड़ा की शिबपुर सीट से टिकट इसलिए नहीं दिया गया क्योंकि उन्होंने पांच करोड़ रुपये की रिश्वत देने से इनकार कर दिया था। उन्होंने दावा किया कि पार्टी में योग्यता के बजाय पैसे को प्राथमिकता दी जा रही है। तिवारी ने कहा, ‘यह सब होना ही था। जब पूरी पार्टी भ्रष्टाचार में डूबी हो, तो परिणाम तो ऐसे ही आने थे। लगभग 70-72 उम्मीदवारों ने टिकट पाने के लिए पांच-पांच करोड़ रुपये दिए थे। मैंने मना कर दिया और इसका खामियाजा मुझे भुगतना पड़ा। अब टीएमसी का अध्याय मेरे लिए समाप्त हो चुका है।’

मंत्री पद था ‘खोखला’

खेल मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल को याद करते हुए तिवारी ने इसे ‘लॉलीपॉप’ करार दिया। उन्होंने कहा कि उनके पास अधिकार नाम की कोई चीज नहीं थी। जब भी वे राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सामने अपने निर्वाचन क्षेत्र की समस्याओं को उठाने की कोशिश करते, उन्हें बीच में ही रोक दिया जाता था।

बुनियादी ढांचे की अनदेखी

हाउड़ा जिले के विधायक के तौर पर तिवारी ने सीवेज और जल निकासी व्यवस्था को सुधारने की भरपूर कोशिश की, लेकिन उन्हें स्थानीय प्रशासन का सहयोग नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी के वफादारों द्वारा नियंत्रित नगर पालिकाओं में वर्षों से चुनाव नहीं हुए, जिससे विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़े हैं।

रिश्वत के आरोपों पर मनोज तिवारी का करारा जवाब

तिवारी पर कुछ स्थानीय पार्षदों द्वारा जबरन वसूली के आरोप भी लगाए गए थे। इस पर पूर्व क्रिकेटर ने मजबूती से जवाब देते हुए कहा, ‘मैंने आईपीएल में 10 साल और प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 20 साल खेले हैं। मैंने अपने चुनाव हलफनामे में 20 करोड़ रुपये की नकदी घोषित की थी। मुझे जबरन वसूली की जरूरत नहीं है। ये सभी आरोप मुझे बदनाम करने की राजनीतिक साजिश थे।’

भविष्य की राह: क्रिकेट कोचिंग में वापसी

राजनीति के इस कड़वे अनुभव के बाद, मनोज तिवारी अब अपने पहले प्यार यानी क्रिकेट की ओर वापस लौट रहे हैं। उन्होंने बीसीसीआई का लेवल-2 कोचिंग कोर्स ‘डिस्टिंक्शन’ के साथ पास किया है। अब वे क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल (CAB) के साथ जुड़कर एक पेशेवर कोच के रूप में अपनी नई पारी शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं।

निष्कर्ष

एमएस धोनी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खेलने वाले मनोज तिवारी का यह राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा है। उन्होंने जिस तरह से राजनीति की आंतरिक कमियों और भ्रष्टाचार को उजागर किया है, वह यह दर्शाता है कि खेल के मैदान की ईमानदारी और राजनीति की जटिलता में बहुत बड़ा अंतर है। अब देखना यह होगा कि क्या वे अपने क्रिकेट कोचिंग करियर में भी वही ऊंचाइयां हासिल कर पाते हैं जो उन्होंने खेल के दिनों में की थीं।

  • मुख्य बिंदु: टीएमसी पर 5 करोड़ रुपये की रिश्वत का आरोप।
  • आरोप: योग्यता से ऊपर पैसे को महत्व।
  • भविष्य: बीसीसीआई लेवल-2 कोच के रूप में नई शुरुआत।

अस्वीकरण: यह लेख मनोज तिवारी द्वारा दिए गए सार्वजनिक बयानों और रिपोर्टों पर आधारित है।

Milo Singh

Milo Singh is a cricket data analyst and writer for BBC Sport, where he decodes the game through advanced analytics, performance metrics, and tactical breakdowns. A Punjabi-born tech graduate turned journalist, Singh combines a computer scientist’s rigour with a fan’s intuition. He specialises in T20 match-ups, Indian domestic talent scouting, and the evolving role of technology in umpiring and coaching. After completing his MA at Cardiff University, Singh became a regular voice on BBC Test Match Special's digital platforms and a contributor to The Analyst and CricViz. Whether explaining expected wickets in the Powerplay or visualising a Ranji Trophy breakout star, his work makes complex data accessible and compelling for all cricket lovers.