Lawrence’s latest hundred not enough for Surrey win – or England call-up
शानदार फॉर्म के बावजूद डेन लॉरेंस की मेहनत अधूरी
काउंटी चैंपियनशिप के एक रोमांचक मुकाबले में सरे और हैम्पशायर के बीच हुआ मैच भले ही ड्रॉ पर समाप्त हुआ हो, लेकिन चर्चा का केंद्र केवल एक नाम रहा – डेन लॉरेंस। द ओवल में खेले गए इस मैच में लॉरेंस ने अपनी बल्लेबाजी का अद्भुत नमूना पेश किया। उन्होंने पहली पारी में 218 रनों की विशाल पारी खेलने के बाद दूसरी पारी में भी केवल 64 गेंदों में 101 रन जड़ दिए। इसके बावजूद, Lawrence’s latest hundred not enough for Surrey win – or England call-up साबित हुआ, क्योंकि उन्हें इंग्लैंड की टेस्ट टीम में जगह नहीं मिल सकी।
मैच का रोमांच और मौसम की बाधा
इस मैच में मौसम ने भी काफी खलल डाला, जिसके कारण शुरुआती तीन दिनों में 92 ओवर का खेल प्रभावित हुआ। सरे ने जीत के लिए पूरा जोर लगाया, लेकिन अंतिम दिन तक खेल खिंचने के बावजूद परिणाम उनके पक्ष में नहीं रहा। सरे ने अपनी दूसरी पारी 259/5 पर घोषित की, जिससे हैम्पशायर के सामने जीत के लिए 348 रनों का लक्ष्य रखा गया। हालांकि, हैम्पशायर ने दूसरी पारी में 101/2 का स्कोर बनाकर मैच को ड्रॉ कराने में सफलता हासिल की।
डेन लॉरेंस का ऐतिहासिक प्रदर्शन
डेन लॉरेंस का प्रदर्शन इस मैच में सांख्यिकीय रूप से भी ऐतिहासिक रहा। वे काउंटी चैंपियनशिप के इतिहास में एक ही मैच में दोहरा शतक और शतक (एक रन प्रति गेंद से अधिक की दर से) बनाने वाले केवल दूसरे बल्लेबाज बने। उनसे पहले 1990 में ग्रीम हिक ने यह उपलब्धि हासिल की थी। सरे के लिए यह कारनामा करने वाले वे केवल तीसरे खिलाड़ी हैं। उनके खेल में आत्मविश्वास और आक्रामकता का जो संगम दिखा, वह लंबे समय तक याद रखा जाएगा। विशेष रूप से फेलिक्स ऑर्गन और जेम्स फुलर की गेंदबाजी पर लगाए गए उनके छक्के देखने लायक थे।
इंग्लैंड की टीम में जगह क्यों नहीं?
यह सवाल क्रिकेट जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है कि इतना शानदार प्रदर्शन करने के बाद भी लॉरेंस को न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे टेस्ट के लिए 15 सदस्यीय टीम में शामिल क्यों नहीं किया गया। चयनकर्ताओं ने उनके बजाय जॉर्डन कॉक्स को अतिरिक्त बल्लेबाज के रूप में तरजीह दी। लॉरेंस का इस सीजन का यह पांचवां काउंटी शतक था, जो उनकी निरंतरता को दर्शाता है।
हैम्पशायर की जुझारू बल्लेबाजी
मैच के अंतिम पलों में हैम्पशायर के बल्लेबाज अली ओर और जेक लेहमन ने सरे के गेंदबाजों को कड़ी टक्कर दी। रीस टोपली ने शुरुआती विकेट निकालकर सरे की उम्मीदें जगाई थीं, लेकिन ओर और लेहमन की साझेदारी ने मैच का पासा पलट दिया। ओर 53 रन बनाकर नाबाद रहे, जबकि लेहमन ने 26 रनों का योगदान दिया। खराब रोशनी और समय की कमी के कारण अंततः दोनों कप्तानों ने मैच को ड्रॉ पर समाप्त करना ही उचित समझा।
निष्कर्ष
भले ही सरे इस मैच को जीत न सका हो और लॉरेंस को फिलहाल इंग्लैंड की जर्सी न मिली हो, लेकिन लॉरेंस का यह प्रदर्शन उनके करियर के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है। यह देखना दिलचस्प होगा कि चयनकर्ता आने वाले समय में उनकी इस अद्भुत फॉर्म का संज्ञान लेते हैं या नहीं। डोम सिबली का नाबाद शतक भी सरे के लिए सकारात्मक रहा, जिन्होंने अपनी टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
