“Rohit Sharma wanted Rishabh Pant to go for the win”: Ravichandran Ashwin makes – Rohit Sharma wanted Rishabh Pant to go for the win: Ravichandran Ashwin makes Gabba खुलासा
गाबा की ऐतिहासिक जीत का अनकहा सच
भारतीय क्रिकेट इतिहास के पन्नों में 19 जनवरी, 2021 की तारीख स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। ब्रिसबेन के गाबा मैदान पर भारत ने ऑस्ट्रेलिया को तीन विकेट से हराकर जो जीत हासिल की थी, वह केवल एक मैच नहीं बल्कि भारतीय क्रिकेट की जीवटता की मिसाल थी। हाल ही में दिग्गज स्पिनर आर. अश्विन ने इस टेस्ट मैच के अंतिम दिन ड्रेसिंग रूम में हुई एक महत्वपूर्ण बातचीत का खुलासा किया है, जिससे पता चलता है कि उस जीत की पटकथा कैसे लिखी गई थी।
ड्रेसिंग रूम की दो राय
अश्विन के अनुसार, जब टीम इंडिया 328 रनों के कठिन लक्ष्य का पीछा कर रही थी, तब ड्रेसिंग रूम में रणनीति को लेकर एक मत नहीं था। तत्कालीन मुख्य कोच रवि शास्त्री का मानना था कि टीम को मैच को ड्रॉ कराने की ओर देखना चाहिए, ताकि सीरीज में बढ़त बनी रहे। दूसरी ओर, रोहित शर्मा का दृष्टिकोण बिल्कुल अलग था। उनका मानना था कि टीम को जीत के लिए जाना चाहिए और ऋषभ पंत जैसे आक्रामक बल्लेबाज के पास मैच जिताने की क्षमता है।
अश्विन ने खुलासा किया, ‘Rohit Sharma wanted Rishabh Pant to go for the win: Ravichandran Ashwin makes’ बयान के जरिए यह साफ होता है कि रोहित शर्मा ने उस समय टीम के रुख को बदल दिया था। उन्होंने पंत पर अटूट विश्वास जताया और उन्हें खुलकर खेलने के लिए प्रेरित किया।
ऋषभ पंत की शानदार बल्लेबाजी
रोहित शर्मा का वह भरोसा बेकार नहीं गया। ऋषभ पंत ने गाबा में नाबाद 89 रनों की मैच जिताऊ पारी खेलकर न केवल आलोचकों का मुंह बंद किया, बल्कि ऑस्ट्रेलिया के 32 वर्षों से चले आ रहे अजेय अभियान को भी रोक दिया। पंत ने चेतेश्वर पुजारा और वॉशिंगटन सुंदर के साथ मिलकर महत्वपूर्ण साझेदारियां कीं और मैच के अंतिम सत्र में 162 रन बनाकर भारत को एक यादगार जीत दिलाई।
सीरीज का टर्निंग पॉइंट
2020-21 के पूरे ऑस्ट्रेलिया दौरे पर ऋषभ पंत का प्रदर्शन काबिले तारीफ रहा था। पहले टेस्ट से बाहर रहने के बाद, पंत ने वापसी करते हुए मेलबर्न में 29 रन बनाए, जिसने टीम का आत्मविश्वास बढ़ाया। इसके बाद सिडनी टेस्ट में चोटिल होने के बावजूद उन्होंने 97 रनों की तूफानी पारी खेली। उनकी यही सकारात्मक सोच गाबा में भी देखने को मिली।
- सिडनी टेस्ट में चोट के बाद भी पंत का आक्रामक रवैया।
- गाबा में 328 रनों का सफल पीछा करना।
- पंत का पूरी सीरीज में 68.50 की औसत से 274 रन बनाना।
जीत की अहमियत
गाबा में मिली यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि उस समय भारतीय टीम चोटों से जूझ रही थी। मोहम्मद शमी, जसप्रीत बुमराह और उमेश यादव जैसे मुख्य खिलाड़ी बाहर थे। टीम में वॉशिंगटन सुंदर और टी. नटराजन जैसे युवा खिलाड़ियों को पदार्पण (डेब्यू) करने का मौका मिला था। रोहित शर्मा और शुभमन गिल के शुरुआती विकेट गिरने के बाद, पंत ने जिम्मेदारी संभाली और अंत तक क्रीज पर डटे रहे।
यह जीत न केवल भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों के लिए एक सुखद अनुभव थी, बल्कि यह दुनिया भर के क्रिकेट विशेषज्ञों के लिए भी एक सबक थी कि कैसे एक सही नेतृत्व और आक्रामक मानसिकता के साथ असंभव लक्ष्यों को भी हासिल किया जा सकता है। रोहित शर्मा का वह साहसी निर्णय ही था जिसने ऋषभ पंत को उस दिन एक नायक के रूप में उभरने का मौका दिया। आज भी, क्रिकेट प्रेमी उस ऐतिहासिक दिन को याद करते हैं जब भारत ने ऑस्ट्रेलिया को उन्हीं की सरजमीं पर धूल चटाई थी।
