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Shaheen Afridi on Pakistan quicks losing speed: ‘Machines deteriorate with time’ – शाहीन अफरीदी का बड़ा बयान: क्या वाकई धीमी हो रही है पाकिस्तानी गेंदबाजों की रफ्तार?

Victor Jain · · 1 min read

पाकिस्तान की तेज गेंदबाजी: क्या सुनहरा दौर खत्म हो गया?

पाकिस्तान क्रिकेट का इतिहास तेज गेंदबाजों के दबदबे से भरा रहा है। इमरान खान से लेकर वसीम अकरम और शोएब अख्तर तक, पाकिस्तान ने दुनिया को ऐसे गेंदबाज दिए जिन्होंने अपनी रफ्तार से बल्लेबाजों को खौफ में रखा। हालांकि, हालिया समय में स्थिति कुछ अलग है। पाकिस्तानी गेंदबाजों की गति में आई गिरावट न केवल प्रशंसकों के लिए बल्कि क्रिकेट विशेषज्ञों के लिए भी चिंता का कारण बनी हुई है।

शाहीन अफरीदी का नजरिया: ‘मशीनें समय के साथ खराब होती हैं’

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज के आगाज से पहले वनडे कप्तान शाहीन शाह अफरीदी ने इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि गेंदबाजों का शरीर भी एक मशीन की तरह है, जो लगातार क्रिकेट खेलने के बाद थकान महसूस करता है। अफरीदी ने कहा, ‘यह एक सामान्य नियम है कि मशीनें समय के साथ खराब (deteriorate) हो जाती हैं। हम खुद को रिचार्ज करने की कोशिश कर रहे हैं।’

अफरीदी का तर्क है कि जब शरीर को आराम मिलता है, तभी गेंदबाज अपनी पूरी ताकत और गति के साथ गेंदबाजी कर सकता है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पाकिस्तानी खिलाड़ियों का वर्कलोड काफी ज्यादा है और टीम लगातार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में व्यस्त रहती है, जिससे शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।

बांग्लादेश सीरीज में देखने को मिली कड़वी सच्चाई

हाल ही में बांग्लादेश के खिलाफ हुई टेस्ट सीरीज में पाकिस्तानी गेंदबाजों की गति का अंतर साफ तौर पर देखा गया। बांग्लादेश के तेज गेंदबाजों ने जहां लगातार 140 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गेंदबाजी की, वहीं पाकिस्तानी गेंदबाज 120-130 किमी प्रति घंटे के आसपास ही सिमटते दिखे। इस सीरीज में मिली 0-2 की हार के बाद नेशनल क्रिकेट एकेडमी (NCA) अब इस समस्या से निपटने के लिए एक ठोस रणनीति तैयार कर रही है।

शाहीन अफरीदी के करियर में बदलाव

खुद शाहीन अफरीदी की गति में भी हालिया समय में बदलाव आया है। 2022 में घुटने की चोट के बाद से, वह लगातार 140 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गेंदबाजी करने के लिए संघर्ष करते दिखे हैं। आंकड़े बताते हैं कि चोट से पहले अफरीदी का विकेट लेने का औसत 24.86 था, जो बाद में बढ़कर 40 के पार चला गया। यह दर्शाता है कि गति और फिटनेस का सीधा असर उनके प्रदर्शन पर पड़ा है।

मोहम्मद रिजवान की वनडे टीम से छुट्टी पर क्या बोले शाहीन?

गेंदबाजी के अलावा, हालिया चयन में मोहम्मद रिजवान को वनडे टीम से बाहर रखने पर भी काफी सवाल उठे हैं। रिजवान, जो पाकिस्तान के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाजों में से एक रहे हैं, का बाहर होना क्रिकेट जगत के लिए चौंकाने वाला है। हालांकि, शाहीन अफरीदी ने इन अटकलों को खारिज किया है। उन्होंने कहा, ‘रिजवान के लिए वनडे के दरवाजे बंद नहीं हुए हैं। बाबर और मुझे भी कभी टीम से ड्रॉप किया गया था, लेकिन हम वापस आए। यह केवल युवाओं को विश्व कप से पहले मौका देने की प्रक्रिया है।’

भविष्य की रणनीति और तैयारी

पाकिस्तान का मुख्य लक्ष्य अब 16 महीने बाद होने वाला वनडे विश्व कप है। इसी को ध्यान में रखते हुए चयनकर्ता टीम में नए खिलाड़ियों को शामिल कर रहे हैं। रोहेल नजीर, अराफात मिन्हास और अहमद दन्याल जैसे युवा खिलाड़ियों को आजमाया जा रहा है ताकि एक बड़ा पूल तैयार किया जा सके।

निष्कर्ष: शाहीन अफरीदी के बयानों से स्पष्ट है कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड अब खिलाड़ियों के वर्कलोड मैनेजमेंट पर जोर दे रहा है। क्या वे अपनी पुरानी रफ्तार वापस पा सकेंगे? यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन यह तय है कि पाकिस्तान को अपनी गेंदबाजी इकाई को फिर से मजबूत करने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की सख्त जरूरत है।

Victor Jain

Victor Jain is one of the most recognisable bilingual voices in Indian cricket, serving as a senior Hindi commentator for JioCinema and a columnist for The Caravan. A history graduate from the University of Delhi, Victor brings an archival depth to his analysis, often unearthing forgotten tales from India’s pre‑IPL cricketing heritage. He splits his time between the commentary box and the editing suite, having produced acclaimed short documentaries on the rise of the Women’s Premier League and the fast‑bowling culture in Delhi's club circuit. His work spans live match calling on billion‑strong digital platforms, long‑form features, and media rights commentary, always delivered with a distinctive blend of old‑school reverence and new‑age candour. Victor often says he learned more about cricket from the radio commentaries of the 1990s than any coaching manual — a philosophy that shapes his immersive, story‑driven style.