हार्दिक पांड्या का वनडे भविष्य खतरे में: क्या बीसीसीआई ढूंढ रही है नए विकल्प?
हार्दिक पांड्या का वनडे करियर और फिटनेस का संकट
भारतीय क्रिकेट में पिछले कुछ समय से ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या की फिटनेस चर्चा का विषय बनी हुई है। बीसीसीआई के चयनकर्ता अब इस बात को लेकर चिंतित हैं कि क्या हार्दिक पांड्या वनडे प्रारूप में पूरे 10 ओवर गेंदबाजी करने की शारीरिक क्षमता रखते हैं। यह मुद्दा हाल ही में अफगानिस्तान के खिलाफ होने वाली वनडे सीरीज के लिए टीम चयन के दौरान भी प्रमुखता से उठा था।
चयनकर्ताओं की चिंता और आईपीएल 2026 की घटनाएं
आईपीएल 2026 के दौरान हार्दिक पांड्या ने पीठ में ऐंठन (back spasms) की शिकायत की थी, जिसके कारण उन्हें तीन मैचों से बाहर बैठना पड़ा था। मुंबई इंडियंस के कप्तान के रूप में उनकी अनुपस्थिति ने चयनकर्ताओं की चिंताओं को और बढ़ा दिया। रिपोर्टों के अनुसार, बीसीसीआई इस बात से भी नाखुश है कि पीठ की समस्या की शिकायत के बाद हार्दिक ने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) को रिपोर्ट नहीं किया। 2 मई को चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ मैच के बाद से चयन बैठक (19 मई) तक हार्दिक का क्रिकेट से दूर रहना फिटनेस को लेकर बड़े सवाल खड़े करता है।
क्या हार्दिक पांड्या वनडे में 10 ओवर फेंक पाएंगे?
बीसीसीआई के एक वरिष्ठ सूत्र के अनुसार, चयनकर्ता मुख्य रूप से इस बात को लेकर चिंतित हैं कि पांड्या लंबे समय तक गेंदबाजी करने में सक्षम हैं या नहीं। हालांकि हार्दिक रिलायंस की सुविधा और वानखेड़े स्टेडियम में प्रशिक्षण ले रहे हैं, लेकिन उनकी गेंदबाजी क्षमता के बारे में स्पष्टता की कमी है। 2019 के बाद से लगातार चोटें और सर्जरी ने उनके करियर को प्रभावित किया है। उनकी पीठ की समस्याएं इतनी गंभीर रही हैं कि वे 2018 के बाद से टेस्ट क्रिकेट से पूरी तरह दूर हैं।
भविष्य की ओर देखते हुए बीसीसीआई की रणनीति
2027 के वनडे वर्ल्ड कप को ध्यान में रखते हुए बीसीसीआई अब एक मजबूत बैकअप तैयार करने की दिशा में बढ़ रहा है। अगर हार्दिक पांड्या का फिटनेस स्तर वनडे प्रारूप की मांगों को पूरा नहीं करता है, तो बोर्ड अन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है। वर्तमान में चयनकर्ताओं की नजरें नीतीष कुमार रेड्डी और हर्षित राणा जैसे युवा खिलाड़ियों पर टिकी हैं, जो भविष्य में एक कुशल पेस-बॉलिंग ऑलराउंडर की भूमिका निभा सकते हैं।
फिटनेस पर बीसीसीआई का सख्त रुख
हार्दिक पांड्या को अफगानिस्तान सीरीज के लिए चुनी गई टीम में जगह तो दी गई है, लेकिन उनके नाम के साथ एक ‘एस्ट्रिक’ (Asterisk) लगा हुआ है। इसका सीधा अर्थ यह है कि उन्हें अपनी फिटनेस को पूरी तरह साबित करना होगा। बीसीसीआई ने रोहित शर्मा के लिए भी इसी तरह का मानदंड तय किया था। अतीत में भी ऐसा हुआ है कि जब बीसीसीआई ने उन्हें आराम दिया, तो उन्होंने विजय हजारे ट्रॉफी में 10 ओवर गेंदबाजी की थी। हालांकि, निरंतरता और फिटनेस का प्रबंधन अब बीसीसीआई की सर्वोच्च प्राथमिकता बन गया है।
निष्कर्ष
हार्दिक पांड्या निस्संदेह भारतीय क्रिकेट के सबसे प्रतिभाशाली ऑलराउंडरों में से एक हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का दबाव और उनकी शारीरिक स्थिति के बीच का संतुलन बिगड़ता दिख रहा है। भारतीय टीम प्रबंधन और चयनकर्ता अब इस जोखिम को लेने के मूड में नहीं हैं कि किसी प्रमुख खिलाड़ी की फिटनेस पूरी टीम के संतुलन को बिगाड़े। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि हार्दिक अपनी फिटनेस को साबित कर पाते हैं या बीसीसीआई को नई प्रतिभाओं पर दांव लगाना पड़ता है।
