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विराट कोहली क्यों नहीं बने RCB के कप्तान जब रजत पाटीदार हुए बाहर? पुराना बयान आया सामने

Milo Singh · · 1 min read

इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2026 का रोमांच अपने चरम पर है, और इस दौरान रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (आरसीबी) को एक अप्रत्याशित झटके का सामना करना पड़ा। टीम के कप्तान रजत पाटीदार पंजाब किंग्स के खिलाफ धर्मशाला में 17 मई को होने वाले महत्वपूर्ण मुकाबले के लिए अनुपलब्ध हो गए। उनकी चोट के कारण वह आरसीबी टीम के साथ धर्मशाला नहीं जा पाए, जिससे फ्रेंचाइजी को इस अहम मैच से पहले कप्तानी में बदलाव करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

रजत पाटीदार की अनुपस्थिति ने तुरंत ही क्रिकेट प्रशंसकों और विशेषज्ञों के बीच एक सवाल खड़ा कर दिया: क्या पूर्व आरसीबी कप्तान विराट कोहली एक बार फिर टीम की कमान संभालेंगे? कोहली ने वर्षों तक आरसीबी का नेतृत्व किया है और मैदान पर उनकी उपस्थिति ही टीम को एक अलग ऊर्जा देती है। उनकी कप्तानी में टीम ने कई यादगार पल देखे हैं, और संकट के इस समय में, स्वाभाविक रूप से, सभी की निगाहें उन्हीं पर टिकी थीं। हालांकि, जब टॉस के लिए जितेश शर्मा मैदान पर उतरे, तो सभी हैरान रह गए। इस फैसले ने आरसीबी की कप्तानी को लेकर प्रशंसकों के बीच उत्सुकता और कई सवाल खड़े कर दिए।

रजत पाटीदार की अनुपस्थिति में विराट कोहली को क्यों नहीं बनाया गया आरसीबी का कप्तान?

आरसीबी द्वारा धर्मशाला में पंजाब किंग्स के खिलाफ रजत पाटीदार की अनुपस्थिति में विराट कोहली के बजाय जितेश शर्मा को कप्तान चुनने का कारण फ्रेंचाइजी प्रबंधन ने आईपीएल 2026 सीज़न से पहले ही स्पष्ट कर दिया था। यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा था जिसके बारे में प्रबंधन ने पहले ही संकेत दे दिए थे।

जब आरसीबी ने 2024 के मेगा ऑक्शन से पहले अपने रिटेंशन की घोषणा की थी, तभी से आरसीबी की कप्तानी को लेकर कोहली और पाटीदार के बीच बहस छिड़ी हुई थी। हालांकि विराट कोहली ने लगभग एक दशक तक आरसीबी का बड़े जुनून और सफलता के साथ नेतृत्व किया, लेकिन फ्रेंचाइजी प्रबंधन ने यह स्पष्ट कर दिया था कि वे भविष्य के लिए एक दीर्घकालिक कप्तानी विकल्प की तलाश में हैं। यह दृष्टिकोण टीम के दीर्घकालिक स्थायित्व और भविष्य की रणनीतियों को ध्यान में रखते हुए अपनाया गया था।

आरसीबी के क्रिकेट संचालन निदेशक, मो बोबाट ने एक आरसीबी वीडियो में इस पर विस्तार से बताया था। उन्होंने कहा था, “निश्चित रूप से, विराट एक विकल्प थे। यह तो कहने की जरूरत नहीं है, और मैं जानता हूं कि प्रशंसक पहली बार में विराट की ओर ही झुके होंगे, लेकिन हमने रजत के लिए भी बहुत प्यार देखा है।” बोबाट ने आगे कहा, “विराट पर मेरा मुख्य बिंदु यह है कि विराट को नेतृत्व करने के लिए कप्तानी पद की आवश्यकता नहीं है। नेतृत्व करना उनकी सबसे मजबूत प्रवृत्तियों में से एक है। यह उन्हें स्वाभाविक रूप से आता है, भले ही वे कप्तान न हों।” यह बयान इस बात पर जोर देता है कि विराट का नेतृत्व क्षमता किसी पद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनके व्यक्तित्व का एक अभिन्न हिस्सा है।

आरसीबी प्रबंधन का दीर्घकालिक दृष्टिकोण

आरसीबी प्रबंधन, जिसमें मो बोबाट और मुख्य कोच एंडी फ्लावर शामिल हैं, ने यह भी खुलासा किया था कि वे आगे चलकर एक भारतीय कप्तानी विकल्प को प्राथमिकता देंगे। यह निर्णय शायद टीम के अंदरूनी गतिशीलता और भारतीय खिलाड़ियों के साथ बेहतर तालमेल बनाने की इच्छा से प्रेरित था। भारतीय कप्तान होने से टीम को मैदान पर और ड्रेसिंग रूम में भी एक अलग तरह का स्थानीय संबंध और समझ मिलती है, जो अक्सर विदेशी कप्तानों के साथ नहीं हो पाता।

भले ही कोहली टीम के भीतर एक नेतृत्वकर्ता बने हुए हैं, लेकिन फ्रेंचाइजी अब कप्तानी की जिम्मेदारियों को उनसे दूर रखने के लिए प्रतिबद्ध दिख रही है। यह रणनीति कोहली को बल्लेबाजी पर अधिक ध्यान केंद्रित करने और दबाव के बिना अपने खेल का आनंद लेने की स्वतंत्रता भी दे सकती है। प्रबंधन का मानना है कि कोहली की उपस्थिति ही टीम के लिए पर्याप्त प्रेरणा और मार्गदर्शन है, चाहे वे आधिकारिक तौर पर कप्तान न भी हों।

कप्तानी टैग के बिना भी आरसीबी के लिए एक लीडर बने हुए हैं विराट कोहली

विराट कोहली ने 2021 आईपीएल सीज़न के बाद आरसीबी के कप्तान के पद से इस्तीफा दे दिया था, जिससे फ्रेंचाइजी के साथ उनका लंबा कप्तानी कार्यकाल समाप्त हो गया था। हालांकि, आधिकारिक भूमिका न निभाने के बावजूद, कोहली टीम के भीतर सबसे वरिष्ठ नेताओं और मार्गदर्शक हस्तियों में से एक बने हुए हैं। उनकी अनुभवी सलाह और मैदान पर रणनीतिक इनपुट अभी भी टीम के लिए अमूल्य हैं।

यहां तक कि फाफ डु प्लेसिस के तहत पिछले तीन सीज़न के दौरान भी, विराट कोहली मैदान पर लिए जाने वाले निर्णयों और सामरिक चर्चाओं में बहुत अधिक शामिल रहते थे। वे अक्सर गेंदबाजों और फील्डर्स को सलाह देते, कप्तान के साथ रणनीति बनाते और महत्वपूर्ण क्षणों में टीम को प्रेरित करते थे। यह दर्शाता है कि उनका नेतृत्व केवल एक पद तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी स्वाभाविक प्रवृत्ति का एक हिस्सा है।

इसलिए, जब रजत पाटीदार अनुपलब्ध थे, तब भी आरसीबी ने आईपीएल 2026 में जितेश शर्मा को स्टैंड-इन कप्तान के रूप में चुना, जबकि कोहली ने आधिकारिक रूप से कप्तानी टैग की आवश्यकता के बिना ही नेतृत्व करना जारी रखा। यह निर्णय शायद इस विश्वास पर आधारित था कि कोहली अपनी बल्लेबाजी और सामान्य नेतृत्व भूमिका में सबसे प्रभावी रहेंगे, जबकि एक नए भारतीय खिलाड़ी को कप्तानी का अनुभव मिलेगा।

विराट कोहली ने आखिरी बार आरसीबी की कप्तानी कब की थी?

विराट कोहली ने 2021 आईपीएल सीज़न के बाद आरसीबी के कप्तान के रूप में पद छोड़ दिया था, लेकिन उन्होंने अभी भी स्टैंड-इन कप्तान के रूप में फ्रेंचाइजी का नेतृत्व किया है। 2023 सीज़न के दौरान, जब फाफ डु प्लेसिस चोटों से जूझ रहे थे, कोहली ने तीन मैचों में आरसीबी की कप्तानी की थी।

कोहली ने कप्तान के रूप में उन तीन मैचों में से दो जीते थे, और आरसीबी के कप्तान के रूप में उनका आखिरी आधिकारिक खेल आईपीएल 2023 के दौरान एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) के खिलाफ आया था। उस दौरान भी प्रशंसकों ने उन्हें कप्तान के रूप में देखकर काफी उत्साह दिखाया था, जिससे यह साबित होता है कि उनकी कप्तानी का क्रेज आज भी बरकरार है।

आईपीएल 2026 में भी इसी तरह का एक अवसर आया था, लेकिन आरसीबी ने तब भी जितेश शर्मा को ही प्राथमिकता दी थी। यह लगातार दूसरी बार था जब प्रबंधन ने कोहली को स्टैंड-इन कप्तान बनाने के बजाय किसी अन्य भारतीय खिलाड़ी पर भरोसा जताया। यह निर्णय आरसीबी के दीर्घकालिक कप्तानी रणनीति को और अधिक स्पष्ट करता है, जहां वे युवा प्रतिभाओं को विकसित करने और उन्हें नेतृत्व की भूमिकाओं में ढालने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ है कि आरसीबी प्रबंधन एक नई दिशा में आगे बढ़ रहा है, जहां विराट कोहली का सम्मान और महत्व बरकरार है, लेकिन कप्तानी की जिम्मेदारियां युवा और उभरते खिलाड़ियों को सौंपी जा रही हैं। यह टीम के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

Milo Singh

Milo Singh is a cricket data analyst and writer for BBC Sport, where he decodes the game through advanced analytics, performance metrics, and tactical breakdowns. A Punjabi-born tech graduate turned journalist, Singh combines a computer scientist’s rigour with a fan’s intuition. He specialises in T20 match-ups, Indian domestic talent scouting, and the evolving role of technology in umpiring and coaching. After completing his MA at Cardiff University, Singh became a regular voice on BBC Test Match Special's digital platforms and a contributor to The Analyst and CricViz. Whether explaining expected wickets in the Powerplay or visualising a Ranji Trophy breakout star, his work makes complex data accessible and compelling for all cricket lovers.