सौरव गांगुली ने एमएस धोनी की बल्लेबाजी शैली और 2019 विश्व कप हार पर दी बड़ी प्रतिक्रिया
सौरव गांगुली ने एमएस धोनी की बल्लेबाजी पर उठाए सवाल
भारतीय क्रिकेट के दो सबसे प्रभावशाली नाम, सौरव गांगुली और एमएस धोनी, अक्सर चर्चा का विषय बने रहते हैं। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान, गांगुली ने धोनी के खेल के दो अलग-अलग चरणों का विश्लेषण किया और स्वीकार किया कि उन्हें धोनी का शुरुआती आक्रामक अंदाज उनके बाद के संयमित बल्लेबाजी शैली से कहीं अधिक पसंद था।
धोनी के करियर का पहला बनाम दूसरा चरण
राज शमानी के यूट्यूब चैनल पर बात करते हुए, गांगुली ने याद किया कि जब धोनी 2004 में टीम में आए थे, तो वह अपनी बेखौफ बल्लेबाजी और छक्के मारने की अद्भुत क्षमता के लिए जाने जाते थे। गांगुली ने कहा, ‘मैंने शायद ही किसी खिलाड़ी को धोनी की तरह छक्के मारते देखा है। जब मैं कप्तान था, तो वह खुलकर बल्लेबाजी करते थे। मुझे उनका पहला चरण बहुत पसंद था, लेकिन बाद के चरणों में जब वह सिंगल्स और डबल्स पर अधिक ध्यान देने लगे, तो वह शैली मुझे उतनी प्रभावित नहीं कर पाई।’
2019 विश्व कप और सेमीफाइनल की वह दर्दनाक हार
गांगुली ने धोनी के करियर के उस दौर पर भी प्रकाश डाला जहां उनकी ‘फिनिशर’ की छवि को धक्का लगा। 2019 विश्व कप सेमीफाइनल का जिक्र करते हुए, गांगुली ने कहा कि उस मैच में जब भारत को जीत की जरूरत थी, धोनी का वही पुराना ‘मिडास टच’ गायब था। न्यूजीलैंड के खिलाफ उस मैच में रवींद्र जडेजा के आउट होने के बाद, जिम्मेदारी पूरी तरह धोनी पर थी, लेकिन वह मैच को अंतिम परिणाम तक नहीं ले जा सके। स्वयं धोनी ने भी बाद में स्वीकार किया था कि उस हार ने उन्हें मानसिक रूप से तोड़ दिया था और तभी उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास का मन बना लिया था।
आईपीएल 2026 और धोनी का भविष्य
मौजूदा समय में, एमएस धोनी आईपीएल 2026 में चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के साथ जुड़े हुए हैं। हालांकि, 44 वर्षीय धोनी को इस सीजन में चोट के कारण अभी तक एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला है। उनके प्रशंसकों के लिए यह सीजन उनका ‘आखिरी डांस’ माना जा रहा है, लेकिन चोट ने उनकी वापसी को अनिश्चित बना दिया है। रुतुराज गायकवाड़ की कप्तानी में सीएसके ने जरूर लय हासिल की है, लेकिन धोनी की अनुपस्थिति मैदान पर साफ महसूस की जा रही है।
क्या धोनी का दौर वाकई बदल गया था?
गांगुली का मानना है कि समय के साथ धोनी की बल्लेबाजी में जो बदलाव आया, वह शायद उनकी बढ़ती जिम्मेदारी और टीम की जरूरतों का परिणाम था। हालांकि, एक प्रशंसक के नजरिए से देखें तो वह आक्रामक धोनी, जिसने विजाग में पाकिस्तान के खिलाफ 148 और श्रीलंका के खिलाफ 183 रनों की नाबाद पारी खेली थी, हमेशा याद किया जाएगा। गांगुली का यह बयान धोनी के प्रशंसकों के बीच एक नई बहस छेड़ सकता है, लेकिन यह स्पष्ट है कि दादा का धोनी के प्रति सम्मान आज भी कायम है, भले ही वह उनकी बल्लेबाजी शैली के आलोचक रहे हों।
निष्कर्ष के तौर पर, सौरव गांगुली और एमएस धोनी का रिश्ता हमेशा से ही गुरु-शिष्य जैसा रहा है। जहाँ दादा ने धोनी को निखारा, वहीं धोनी ने अपनी मेहनत से भारतीय क्रिकेट को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। उनके खेल के बारे में गांगुली की यह आलोचनात्मक टिप्पणी उस युग के दो दिग्गजों के बीच के गहरे जुड़ाव को दर्शाती है।
